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जेएनयू कैंपस में अवैध भवनों का निर्माण, एनजीटी ने दो हफ्ते मे मांगा जवाब 

Tue, 27 Sep 2016 09:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 27 Sep 2016 09:43 AM IST
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illegal construction in jnu campus ngt asked answer in two week

जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू) पर पर्यावरण संवेदी क्षेत्र दक्षिणी रिज एरिया में कुल सात भवनों के अवैध निर्माण का आरोप लगा है। गैर सरकारी संस्थान चेतना ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में याचिका दाखिल कर यह आरोप लगाया है।

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वहीं एनजीटी ने याचिका पर विचार के बाद पर्यावरण मंत्रालय, जेएनयू व दिल्ली विकास प्राधिकरण के साथ दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर दो हफ्तों में जवाब मांगा है। मामले पर अगली सुनवाई 7 नवंबर को होगी।
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जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले पर सुनवाई कर रही है। गैर सरकारी संस्था चेतना ने आरोप लगाया है कि बिना पर्यावरण मंजूरी के जेएनयू और नेशनल इंटेलीजेंस ग्रिड व सीआरपीएएफ के जरिए भवन निर्माण किया जा रहा है।
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वहीं पीठ की ओर से सवालों के बाद याची की ओर से कहा गया है कि वह जेएनयू में रिज एरिया में किए जा रहे निर्माण को लेकर अलग-अलग याचिकाएं दाखिल करेंगे।

सुनवाई के दौरान याची की ओर से पेश वकील ने कहा कि जेएनयू कैंपस में सात भवनों का निर्माण अवैध तरीके से वन क्षेत्र के पर्यावरण संवेदी क्षेत्र में किया जा रहा है। याची के मुताबिक जेएनयू कैंपस दक्षिणी मध्य रिज एरिया के तहत आता है।

यह क्षेत्र वन आरक्षित क्षेत्र है। इस क्षेत्र में किसी तरह के निर्माण से पहले पर्यावरण मंजूरी लेना अनिवार्य है। जबकि जेएनयू ने निर्माण कार्य के लिए रिज मैनेजमेंट बोर्ड से किसी तरह की पर्यावरण मंजूरी नहीं हासिल की है। इसकी वजह से रिज एरिया की पारिस्थितिकी खतरे में है।

याचिका के मुताबिक जिन निर्माण कार्यों पर आरोप लगाया गया है उनमें पश्चिमाबाद स्थित कर्मचारियों के लिए 24 फ्लैट व सरस्वतीपुरम में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, वहीं शिप्रा हॉस्टल के पास एक नया हॉस्टल व एक प्रशासनिक भवन, यमुना हॉस्टल वार्डेन फ्लैट और डाइनिंग हॉल बनाया जा रहा है।

वहीं एनजीओ ने आरोप लगाया है कि वसंतकुंज और घिटोरनी इलाके में नियमों को तोड़कर कूड़े-कचरे की डंपिंग भी की जा रही है। याची का आरोप है कि यह कूड़ा-कचरा 2013 से फेंका जा रहा है।


पीठ ने इन मामलों पर विचार के बाद याची को अलग-अलग याचिकाएं दाखिल करने का भी निर्देश दिया है। वहीं जेएनयू मामले पर विश्वविद्यालय प्रशासन और अन्य प्राधिकरणों से जवाब मांगा है।

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