{"_id":"5ea255e00afb9a33b30984be","slug":"iit-delhi-scientists-succeed-in-fight-against-corona","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कोरोना के खिलाफ लड़ाई में आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों को बड़ी कामयाबी, अब दो घंटे में आएगा रिजल्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना के खिलाफ लड़ाई में आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों को बड़ी कामयाबी, अब दो घंटे में आएगा रिजल्ट
Fri, 24 Apr 2020 08:28 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 24 Apr 2020 08:28 AM IST
विज्ञापन
coronavirus
- फोटो : PTI
कोरोना के खिलाफ लड़ाई में आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। आईसीएमआर(भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद)ने आईआईटी वैज्ञानिकों द्वारा कोविड-19 की जांच करने के लिए तैयार तकनीक प्रोब-फ्री-डिटेक्शन एस्से को मंजूरी दे दी है।
इससे सौ फीसदी सटीक नतीजे दो घंटे में मिल सकेंगे। जल्द से जल्द इस कोविड-19 जांच किट को बाजार में उतारा जाएगा। इस पीसीआर जांच किट के लिए आईआईटी दिल्ली की शुक्रवार को दो कंपनी के साथ बैठक भी होगी। इस जांच किट की लागत 250-300 रुपये होगी।
जबकि अभी जांच 45 सौ रुपये में होती है। आईआईटी दिल्ली पहला ऐसा संस्थान है, जिसकी कोविड-19 किट को इतनी जल्दी प्रमाणिकता मिली है। आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर प्रो. वी रामगोपाल राव के मुताबिक, कुसुम स्कूल ऑफ बॉयोलोजिकल साइंसेज की लैब में इसे तकनीक को विकसित किया गया है।
विज्ञापन
इस तकनीक को अनुकूल परिस्थितियों में परखा गया है और संवेदनशीलता की जांच भी की गई है। इसी के आधार पर आईसीएमआर ने इसको मंजूरी दी है। यह स्वदेशी तकनीक पूरी तरह से या फिर यूं कहें सौ फीसदी सटीक नतीजे देगी।
विज्ञापन
इससे सौ फीसदी सटीक नतीजे दो घंटे में मिल सकेंगे। जल्द से जल्द इस कोविड-19 जांच किट को बाजार में उतारा जाएगा। इस पीसीआर जांच किट के लिए आईआईटी दिल्ली की शुक्रवार को दो कंपनी के साथ बैठक भी होगी। इस जांच किट की लागत 250-300 रुपये होगी।
विज्ञापन
जबकि अभी जांच 45 सौ रुपये में होती है। आईआईटी दिल्ली पहला ऐसा संस्थान है, जिसकी कोविड-19 किट को इतनी जल्दी प्रमाणिकता मिली है। आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर प्रो. वी रामगोपाल राव के मुताबिक, कुसुम स्कूल ऑफ बॉयोलोजिकल साइंसेज की लैब में इसे तकनीक को विकसित किया गया है।
विज्ञापन
इस तकनीक को अनुकूल परिस्थितियों में परखा गया है और संवेदनशीलता की जांच भी की गई है। इसी के आधार पर आईसीएमआर ने इसको मंजूरी दी है। यह स्वदेशी तकनीक पूरी तरह से या फिर यूं कहें सौ फीसदी सटीक नतीजे देगी।
Trending Videos
आईआईटी के वैज्ञानिकों की टीम की अगुवाई कर रहे प्रो. विवेकानंद पेरुमल ने बताया कि तुलनात्मक विश्लेषण का उपयोग कर हमने कोविड-19 में अनोखे क्षेत्रों की पहचान की थी। इसकी मदद से कोविड-19 का आसानी से पता लग जाता है।
वहीं, प्रो. मनोज मेनन ने बताया कि मौजूदा तरीके जांच आधारित हैं। जबकि आईआईटी की टीम ने जांच रहित तरीका इजाद किया है। इससे जांच का खर्च बेहद कम हो जाता है और प्रमाणिकता से भी समझौता नहीं होता है। उनके मुताबिक, इस जांच में अधिक उपकरणों की जरूरत नहीं पड़ती है और यह गुणात्मक रूप से सटीक है।
वहीं, प्रो. मनोज मेनन ने बताया कि मौजूदा तरीके जांच आधारित हैं। जबकि आईआईटी की टीम ने जांच रहित तरीका इजाद किया है। इससे जांच का खर्च बेहद कम हो जाता है और प्रमाणिकता से भी समझौता नहीं होता है। उनके मुताबिक, इस जांच में अधिक उपकरणों की जरूरत नहीं पड़ती है और यह गुणात्मक रूप से सटीक है।