जम्मू की बाढ़ में इग्नू के वीसी पत्नी समेत लापता
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इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के वाइस चांसलर (वीसी) मो.असलम उन हजारों लोगों में से एक हैं जो कश्मीर की भयानक बाढ़ में फंसे हुए हैं।
हालांकि वीसी 7 सितंबर के बाद से किसी के किसी के भी संपर्क में नहीं हैं पर यूनिवर्सिटी के अधिकारी लगातार उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। अधिकारियों ने उनसे कई तरीकों से संपर्क करने की कोशिश की पर सब बेकार गया।
यूनिवर्सिटी के एक उच्च अधिकारियों का कहना है कि वीसी अपनी पत्नी के साथ कश्मीर में शादी में शिरकत करने गए थे और रविवार तक लौटने वाले थे पर वो अभी तक वापस नहीं लौटे हैं।
उम्मीद है वापस लौट आएंगे
अधिकारियों के मुताबिक वो इस समय किसी के संपर्क में नहीं और ये माना जा रहा है कि वो जहां होंगे वहां नेटवर्क की गड़बड़ी चल रही होगी।
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने वीसी को ढूंढने के लिए राज्य सरकार और सेना के जवानों से संपर्क साधा है जो राहत एवं बचाव कार्य में लगे हुए हैं। अभी तक वीसी के बारे में इन दोनों ही जगहों से कोई खबर नहीं मिली है।
वीसी कार्यालय के एक अधिकारी असलम के अनुसार वीसी हजरतबल क्षेत्र में हो सकते हैं। अनुमान है कि प्रोफेसर कॉलोनी के ब्रॉडवे लेन के वार्ड 12 में हैं। अधिकारी के अनुसार वीसी सीधे तौर पर बाढ़ से प्रभावित नहीं हैं। जम्मू में अब भी बिजली नहीं है और कम्यूनिकेशन की व्यवस्था की जा रही है।
जिस पुल से पार आए वह भी बह गया
कश्मीर में आयी जल प्रलय में फंसे गाजियाबाद के मुरादनगर के दो परिवार बुधवार को सकुशल घर लौट आए। कश्मीर में दोनों परिवारों ने तबाही और मौत का जो तांडव अपनी आंखों से देखा उसे बयान करते हुए भी उनकी आवाज भर्रा उठती हैं।
इन परिवारों की आंखों के सामने ही गाड़ियां, दुकानें, मकान, पेड़, आदमी सब पानी में बह गए। भूख और प्यास से बेहाल दोनों परिवार चार दिनों तक होटल में फंसे रहे और साथ गए बच्चे भी सहमे हुए हैं। वापस लौटे तो परिजनों को देख उनकी आंखें भी छलक उठीं।
मेन रोड कृष्णा कालोनी निवासी मनीष गर्ग अपनी पत्नी भावना, बेटी आशी(7)व बेटे यश(5) और विजयमंडी निवासी अंकुर बंसल अपनी पत्नी शिखा व बेटे इशांत(5) के साथ 3 सितंबर को जम्मू कश्मीर में घूमने गए थे। अंकुर ने बताया कि तीन सितंबर को हवाई जहाज से जम्मू कश्मीर पहुंचे। वहां लाल चौक स्थित बहुमंजिला होटल में रुके थे।
शाम को डल झील घूमने पहुंचे तो बारिश से झील का जलस्तर अचानक बढ़ गया। स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने तुरंत ही डल झील खाली कराकर सभी पर्यटकों को होटल भेज दिया। आगे की योजना बना ही रहे थी कि भारी बारिश शुरू हो गई।
कुछ ही वक्त में होटल के चारों तरफ पानी भर गया। रात्रि में पानी के तेज बहाव की आवाज सुनकर ही रूह कांप उठी। गाड़ियां, मकान सब खिलौनों की तरह पानी के वेग में बह रहे थे। यह भयानक मंजर देख होटल में रुके लोगों में सांसें थम सी गईं।
चार दिन तक होटल में खाना नहीं मिलने पर बच्चे भूख से बिलबिला उठे। पानी कम होने पर 7 सितंबर की सुबह किसी तरह होटल से एयरपोर्ट के लिए निकले। लालचौक पर बना पुल पानी से ढक गया था। किसी तरह खुद हिम्मत बांधी और बच्चों को ढाढस देकर पुल पार किया।
आधे घंटे बाद ही पता चला कि पुल पानी में बह गया। अगर शाम तक रुकते तो वापस आना बहुत मुश्किल था। मुरादनगर में परिजनों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा था। परिवार सकुशल लौटा तो परिजनों ने बच्चों को सीने से लगा लिया और उनकी आंख से खुशी के आंसू झलक पडे़।
7 दिन बाद घर लौटे सुनील का सेना को सलाम
चारों ओर पानी ही पानी, हाहाकार करते लोग और पेट भरने के लिए सेना की राहत सामग्री का इंतजार। सात दिन से श्रीनगर एयरपोर्ट पर फंसे गाजियाबाद के शालीमार गार्डन निवासी आईटी कंपनी मैनेजर ने प्रलय की दास्तां सुनाई। वायुसेना के विमान में दिल्ली पहुंचे सुनील ने सेना के जज्बे को सलाम किया।
एक सितंबर को एक धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने 50 लोगों के जत्थे के साथ सुनील श्रीनगर गए थे। दो तारीख से ही वहां बारिश शुरू हो गई, जिसके बाद से वहां बाढ़ के हालात बन गए।
सेना के हेलीकाप्टर से श्रीनगर के गवर्नर हाउस पहुंचे। वहां सैकड़ों की संख्या में लोग शरण लिए थे। लोगों के घर का सामान सड़कों पर पानी में बह रहा था। बड़े-बच्चे सभी सेना से बचाने की अपील कर रहे थे। ऐसे में छह-आठ ब्रेड खाकर पूरा दिन बिताना पड़ा। मंगलवार शाम को सेना के जहाज से पालम पहुंचे। इसके बाद घर पहुंचकर राहत की सांस ली।