रिटायर्ड कर्नल-एडीएम विवाद: अधूरी फाइल देखकर मंडलायुक्त और आईजी ने अधिकारियों को लगाई फटकार
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रिटायर्ड कर्नल और एडीएम के विवाद मामले में बुधवार को अचानक मंडलायुक्त और आईजी ने नोएडा पहुंचकर प्राधिकरण के अधिकारियों की परेशानी बढ़ा दी। दोनों ने रिटायर्ड कर्नल की शिकायत के बारे में पूछताछ की तो अधिकारी फाइल लेकर डीएम कैंप कार्यालय पहुंचे, लेकिन फाइल आधी-अधूरी थी।
इसे देखकर मंडलायुक्त ने प्राधिकरण अफसरों को फटकार लगाई। उन्होंने अधिकारियों ने पूछा कि जब रिटायर्ड कर्नल का विवाद शुरू हुआ था तो इसे दूर करने के लिए किसकी जिम्मेदारी थी। इसके अलावा लापरवाही बरतने में कौन अधिकारी जिम्मेदार है तो प्राधिकरण अफसर चुप्पी साध गए।
दरअसल, 14 अगस्त को नोएडा के सेक्टर-29 में रिटायर्ड कर्नल वीरेंद्र प्रताप सिंह चौहान को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया था। मामले में पुलिस अधिकारियों की लापरवाही सामने आई तो शासन ने संज्ञान ले लिया। इसके बाद तत्कालीन सीओ अनित कुमार और इंस्पेक्टर मनीष सक्सेना को जिले से बाहर भेजकर सिटी मजिस्ट्रेट का भी तबादला करके एडीएम के पद पर बलरामपुर भेज दिया गया, लेकिन प्राधिकरण अफसरों की घोर लापरवाही के बाद भी उन पर कार्रवाई नहीं हुई।
रिटायर्ड कर्नल के 9 घंटे में किए बयान दर्ज
शहर के लोग लगातार प्राधिकरण अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इसी वजह से बुधवार सुबह करीब 11 बजे डीएम कैंप कार्यालय पर मेरठ मंडलायुक्त अनीता मेश्राम और आईजी रेंज रामकुमार दोबारा जांच करने पहुंचे। उन्होंने डीएम बीएन सिंह, एसएसपी डॉ. अजयपाल शर्मा, एडीएम, एसपी सिटी और एसडीएम समेत कई अधिकारियों के साथ करीब छह घंटे तक बैठक की। इसके अलावा प्राधिकरण के अफसरों से पूरे प्रकरण में चली फाइल को पेश करने के लिए कहा।
ओएसडी राजेश कुमार सिंह, ओएसडी संतोष कुमार और सीनियर मैनेजर एससी मिश्रा आदि अधिकारी फाइल लेकर डीएम आफिस पर पहुंचे, लेकिन मंडलायुक्त ने मामले की अधूरी फाइल देखी तो वह नाराज हो गईं और तीनों अधिकारियों पर बिफर गईं।
रिटायर्ड कर्नल और एडीएम के विवाद में एसपी क्राइम को जांच मिली है और वही पूरे प्रकरण की विवेचना कर रहे हैं। एसपी अशोक कुमार सिंह ने बताया कि वह पूरे मामले में गवाह और सीसीटीवी फुटेज आदि का संकलन कर रहे हैं। अभी केवल रिटायर्ड कर्नल के बयान दर्ज किए हैं।
परिवार ने की मुकदमा समाप्त करने की मांग
एसपी ने सेक्टर-20 पुलिस से थाने की सीसीटीवी फुटेज भी मांगी है। रिटायर्ड कर्नल ने अपने बयान में पुलिस पर थाने में अभद्रता करने का भी आरोप लगाया है, लेकिन पुलिस ने जानकारी दी है कि यह उनके सरकारी दस्तावेज में दर्ज है कि सीसीटीवी कैमरे नहीं चल रहे हैं, इसलिए उसकी कॉपी मांगी गई है।
रिटायर्ड कर्नल और उनके परिवार ने पुलिस द्वारा एडीएम के कहने पर किए गए मुकदमे को समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पूरा मामला एडीएम की शह से प्रेरित था और उनका एडीएम से निजी रूप से कोई विवाद नहीं था।
वह तो केवल अतिक्रमण की शिकायत कर रहे थे। इसलिए उन पर किया गया मुकदमा फर्जी है और इसी कारण उनको जबरन जेल भिजवाया गया था। हालांकि, एसपी ने इस बात से फिलहाल इंकार किया है कि वह दोनों पक्ष के बयान दर्ज करके बाद ही आगे की कार्रवाई करेंगे।