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व्यवस्था से तंग IFS अधिकारी संजीव, PM को लिखी खुली चिट्ठी

Tue, 08 Dec 2015 04:14 AM IST
Updated Tue, 08 Dec 2015 04:14 AM IST
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IFS officer Sanjiv Chaturvedi write a letter to PM

एम्स के पूर्व सीवीओ और उत्तराखंड कैडर के आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने व्यवस्था से परेशान होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली चिट्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने कहा है कि देश में धार्मिक सहिष्णुता और असहिष्णुता पर बेकार की बहस चल रही है, जबकि सच तो यह है कि देश की व्यवस्था में सिविल सेवाओं के ईमानदार अधिकारियों के खिलाफ असहिष्णुता बरती जा रही है।

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उन्होंने कहा कि ईमानदार अधिकारियों को परेशान किया जा रहा है और उन पर हमले भी हो रहे हैं। वर्तमान में ईमानदार और कानून का पालन करने वाले सिविल सेवा अधिकारी सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं।

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एम्स और स्वास्थ्य मंत्रालय की आनाकानी के बाद संजीव ने रेमन मैग्सेसे अवार्ड में मिले करीब 20 लाख रुपये की राशि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में दान करने का निर्णय लिया।
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एम्स उनके साथ अस्पृश्यता का व्यवहार कर रहा है

IFS officer Sanjiv Chaturvedi write a letter to PM

संजीव चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि देश में सार्वजनिक तौर पर बेकार की धार्मिक सहिष्णुता और असहिष्णुता पर बहस चल रही है। इस वजह से स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा, पीने का पानी, ऊर्जा, वातावरण जैसे अहम मुद्दे गौण होते जा रहे हैं।


चतुर्वेदी ने कहा कि एम्स प्रशासन और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय उनके साथ अस्पृश्यता का व्यवहार कर रहा है। रेमन मैग्ससे अवार्ड के तौर पर मिली 20 लाख रुपये की राशि उन्होंने एम्स में गरीब मरीजों के इलाज के लिए दान की, लेकिन एम्स ने इस पर स्वास्थ्य मंत्रालय की राय मांगी थी। तीन माह बीतने के बाद एम्स ने 15 नवंबर को चेक लौटा दिया।

उन्होंने कहा कि वह इस नेक काम में कोई और विवाद नहीं चाहते और अवार्ड की 19,85,187 रुपये की राशि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में दान करना चाहते हैं, इसे स्वीकार किया जाए।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री पर आरोप

IFS officer Sanjiv Chaturvedi write a letter to PM

संजीव चतुर्वेदी ने कहा कि जेपी नड्डा स्वास्थ्य मंत्री बनने से पहले से ही उन्हें सीवीओ पद से हटाने और एम्स में भ्रष्टाचार की जांच पर रोक लगाने की मांग करते रहे। बाद में उन्हें ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री बना दिया गया।


इस मामले में आपको पत्र लिखकर स्वतंत्र जांच के लिए आग्रह किया था, लेकिन न जाने किस वजह से आज तक स्वतंत्र जांच शुरू नहीं हो पाई। उन्होंने कहा, ‘ इसके बाद से मेरा वजूद सिर्फ कोर्ट के हस्तक्षेप से बचा हुआ है।

कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद भी आज तक मुझे वह काम नहीं दिया गया, जिसके लिए मुझे एम्स लाया गया था। यह सब मेरी ओर से एम्स में भ्रष्टाचार के खिलाफ की गई कार्रवाई का परिणाम है। यह सब स्थिति देश के प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप के बाद है, ऐसे में देश के सिविल सेवा के अधिकारियों के लिए अधिकारी के लिए कोई आशा नहीं बच जाती है।’

पीएम को लिखे पत्र में संजीव ने कहा, ‘मैं आपसे व्यक्तिगत तौर पर मिलकर मन की बात करना चाहता हूं। इसके लिए मैं पिछले एक वर्ष से कोशिश कर रहा हूं, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है।

मुझे उम्मीद है कि अब केंद्र सरकार ईमानदार और कानून का पालन करने वाले और कराने वाले सिविल सेवा अधिकारियों के प्रति असहिष्णुता और अस्पृश्यता का व्यवहार नहीं करेगी।’

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