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Delhi NCR News: नींद की कमी से कमजोर हो रही याददाश्त तो 20 मिनट की एरोबिक एक्सरसाइज आ सकती है काम
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कसरत करने वालों की याददाश्त का प्रदर्शन झपकी लेने वालों के करीब रहा, हालांकि पूरी नींद का कोई विकल्प नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
रात में ठीक से नींद नहीं लेने के कारण अगर आपको बातें याद रखने या नई जानकारी समझने में परेशानी होती है, तो 20 मिनट की एरोबिक एक्सरसाइज कुछ मदद कर सकती है। एक नए अध्ययन में पाया गया कि लंबे समय तक जागने के बावजूद थोड़ी देर की कसरत करने वाले लोगों की याददाश्त का प्रदर्शन बेहतर रहा। इसका असर 90 मिनट की झपकी लेने वालों के करीब था। ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज’ में प्रकाशित इस अध्ययन में 18 से 35 साल की उम्र के 53 स्वस्थ लोगों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने उन्हें 30 घंटे तक जगाकर रखा और तीन समूहों में बांटा। एक समूह ने 20 मिनट तक एरोबिक एक्सरसाइज की, दूसरे ने 90 मिनट की झपकी ली, जबकि तीसरे समूह ने बिना कसरत किए एक्सरसाइज बाइक पर समय बिताया। तीन दिन बाद जब प्रतिभागियों से तस्वीरों को पहचानने के लिए कहा गया, तो कसरत करने वाले समूह ने 56 प्रतिशत तस्वीरों की सही पहचान की। झपकी लेने वाले समूह का प्रदर्शन 57 प्रतिशत रहा, जबकि बिना कसरत या झपकी वाले समूह ने 46 प्रतिशत तस्वीरों की सही पहचान की।
पूरी नींद लेना अब भी जरूरी :
एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रोफेसर मंजरी त्रिपाठी के अनुसार, गहरी नॉन-आरईएम नींद घटनाओं से जुड़ी यादों को मजबूत करने में मदद करती है, जबकि आरईएम नींद भावनात्मक यादों को समझने और व्यवस्थित करने में अहम भूमिका निभाती है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
रात में ठीक से नींद नहीं लेने के कारण अगर आपको बातें याद रखने या नई जानकारी समझने में परेशानी होती है, तो 20 मिनट की एरोबिक एक्सरसाइज कुछ मदद कर सकती है। एक नए अध्ययन में पाया गया कि लंबे समय तक जागने के बावजूद थोड़ी देर की कसरत करने वाले लोगों की याददाश्त का प्रदर्शन बेहतर रहा। इसका असर 90 मिनट की झपकी लेने वालों के करीब था। ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज’ में प्रकाशित इस अध्ययन में 18 से 35 साल की उम्र के 53 स्वस्थ लोगों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने उन्हें 30 घंटे तक जगाकर रखा और तीन समूहों में बांटा। एक समूह ने 20 मिनट तक एरोबिक एक्सरसाइज की, दूसरे ने 90 मिनट की झपकी ली, जबकि तीसरे समूह ने बिना कसरत किए एक्सरसाइज बाइक पर समय बिताया। तीन दिन बाद जब प्रतिभागियों से तस्वीरों को पहचानने के लिए कहा गया, तो कसरत करने वाले समूह ने 56 प्रतिशत तस्वीरों की सही पहचान की। झपकी लेने वाले समूह का प्रदर्शन 57 प्रतिशत रहा, जबकि बिना कसरत या झपकी वाले समूह ने 46 प्रतिशत तस्वीरों की सही पहचान की।
पूरी नींद लेना अब भी जरूरी :
एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रोफेसर मंजरी त्रिपाठी के अनुसार, गहरी नॉन-आरईएम नींद घटनाओं से जुड़ी यादों को मजबूत करने में मदद करती है, जबकि आरईएम नींद भावनात्मक यादों को समझने और व्यवस्थित करने में अहम भूमिका निभाती है।
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