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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   "If there is a bell rings at No. 100 does not mean that we do not listen to him '

'100 नंबर पर घंटी बजती रहती है तो उसका अर्थ यह नहीं कि हम उसे नहीं सुनते'

Thu, 28 Jul 2016 01:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 28 Jul 2016 01:10 AM IST
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"If there is a bell rings at No. 100 does not mean that we do not listen to him '
POLICE CONTROL ROOM

दिल्ली पुलिस ने इस तथ्य को गलत बताया है कि वह 100 नंबर की कॉल को नहीं सुनती। पुलिस ने आरोप लगाया कि यह फ्री सेवा होने के कारण एमटीएनएल व अन्य दूरसंचार कंपनियां इसे प्राथमिकता नहीं देतीं हैं। 

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इसके अलावा कॉल लेने की क्षमता का भी अभाव है। हाईकोर्ट ने इस तथ्य के ध्यानार्थ कड़ी नाराजगी जताते हुए संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से जवाब मांगा है।
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न्यायमूर्ति बीडी अहमद और आशुतोष कुमार की खंडपीठ के समक्ष पेश दिल्ली पुलिस के अधिवक्ता ने कहा कि यदि 100 नंबर पर घंटी बजती रहती है तो उसका अर्थ नहीं है कि हम उसे नहीं सुनते।

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'अपराध बढ़ रहे हैं और अपराध व्यस्त घंटो को नहीं देखते'

"If there is a bell rings at No. 100 does not mean that we do not listen to him '
कोर्ट - फोटो : file photo

उन्होंने कहा कि यह फ्री सेवा होने के कारण उसे कंपनियां प्राथमिकता नहीं देती। अदालत ने कहा कि यह काफी गंभीर मामला है और इस मुद्दे पर संबंधित मंत्रालय से जवाब मांगा जाना जरूरी है।

अदालत के समक्ष यह तथ्य उस समय आया जब बताया गया कि पीसीआर कॉल को पहुंचने में औसत 37 मिनट लगते हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता चेतन शर्मा और शैलेंद्र बब्बर ने बताया कि व्यस्त समय में यह समस्या आती है क्योंकि फोन कंपनियां इस नंबर को प्राथमिकता नहीं देती।

अदालत ने उनके तर्क को खारिज करते हुए कहा कि अपराध बढ़ रहे हैं और अपराध व्यस्त घंटो को नहीं देखते। पुलिस ने बताया कि 75 प्रतिशत मामलों में पीसीआर पांच मिनट में पंहुच जाती है और 19 प्रतिशत मामलों में पांच से 10 मिनट लगते हैं। 

वहीं दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि पुलिस का नियंत्रण हमें सौंप दिया जाए तो छह माह में पूरी तरह से सुधार कर दिया जाएगा। खंडपीठ दिसंबर 2012 में हुए सामूहिक बलात्कार मामले के बाद महिलाओं की सुरक्षा मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

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