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शाहीन बाग : दो दिन में रास्ता न खुला तो 50 आरडब्ल्यूए सड़कों पर उतरेंगी
Tue, 21 Jan 2020 08:47 PM IST
अवधेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: अवधेश कुमार
Updated Tue, 21 Jan 2020 08:47 PM IST
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शाहीन बाग प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
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नोएडा-दिल्ली मार्ग एक महीने से अधिक समय से बंद पड़े होने के कारण शाहीन बाग की पड़ोसी कॉलोनियों के निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। 12 जनवरी को मदनपुर खादर, अली गांव प्रियंका कैंप, मोड़बंद, सरिता विहार और आसपास की दर्जनों जेजे कॉलोनियों के लोग भी सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन को उतारू हो गए थे। उस दौरान पुलिस ने इन लोगों को यह कहकर शांत कराया था कि मार्ग जल्द खुलवाया जाएगा, लेकिन ऐसा अब तक नहीं हो पाया है।
कॉलोनियों के निवासियों के बच्चों की बोर्ड परीक्षाएं 10 फरवरी से शुरू हो रही हैं। बाकी बच्चे भी समय से स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। जेजे कॉलोनियों में रहने वाले मजदूर वर्ग के जो लोग नोएडा-फरीदाबाद जाते हैं, वे रोज काम पर देर से पहुंच रहे हैं। ठेकेदार उन्हें वापस लौटा देता है। व्यस्त समय में दूसरे मार्गों पर भी जाम लगा रहता है। इससे लोगों का जीना मुहाल है।
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कॉलोनियों के निवासियों के बच्चों की बोर्ड परीक्षाएं 10 फरवरी से शुरू हो रही हैं। बाकी बच्चे भी समय से स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। जेजे कॉलोनियों में रहने वाले मजदूर वर्ग के जो लोग नोएडा-फरीदाबाद जाते हैं, वे रोज काम पर देर से पहुंच रहे हैं। ठेकेदार उन्हें वापस लौटा देता है। व्यस्त समय में दूसरे मार्गों पर भी जाम लगा रहता है। इससे लोगों का जीना मुहाल है।
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ऐसे में लोगों को 22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार है। इसके बाद वे अगले दो दिन पुलिस के कार्रवाई करने का इंतजार करेंगे। इसके बाद नोएडा, फरीदाबाद और दिल्ली की 50 आरडब्ल्यूए के लोग रास्ता खुलवाने के लिए खुद सड़कों पर उतरेंगे। सरिता विहार निवासी अशोक विधूड़ी का कहना है कि पुलिस गणतंत्र दिवस की बात कहकर उन्हें 24 जनवरी को प्रदर्शन की अनुमति नहीं दे रही है।
उन्होंने कहा कि पुलिस रास्ता खुलवाने के लिए हाथ-पांव जोड़ती रही, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। इसलिए रास्ता खुलवाने के लिए अब स्थानीय लोग स्वयं लामबंद हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पुलिस रास्ता खुलवाने के लिए हाथ-पांव जोड़ती रही, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। इसलिए रास्ता खुलवाने के लिए अब स्थानीय लोग स्वयं लामबंद हो रहे हैं।