IAS टॉपर निधि की जुबानी सफलता की कहानी
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प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा के नतीजों में दिल्ली की लड़कियों ने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ के नारे को सार्थक किया है। तीसरे स्थान पर रहने वाली दिल्ली के उत्तम नगर की निधि गुप्ता भी कुछ ऐसा ही मानती हैं।
उन्होंने अपनी उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि काम करते रहें तो कभी न कभी फल निश्चित रूप से मिलता है, वह परीक्षा का मूल मंत्र देते हुए कहती हैं कि साक्षात्कार में बिल्कुल नहीं डरें, आत्मविश्वास के साथ बात करें।
निधि गुप्ता ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि यह उनका पांचवां प्रयास है। जबकि उन्होंने दूसरी बार सिविल सेवा में सफलता हासिल की है। इससे पहले वह वर्ष 2013 में भारतीय राजस्व सेवा में चुनी जा चुकी हैं।
हार से मिलती है आगे बढ़ने की प्रेरणा
वर्तमान में वह गाजियाबाद भारतीय राजस्व सेवा (सीमा शुल्क और केंद्रीय आबाकारी) अधिकारी हैं। उत्तम नगर के मोहन गार्डन में रहने वाली निधि ने कहा कि कोचिंग से ज्यादा छात्रों को सेल्फ स्टडी पर फोकस करना चाहिए।
हालांकि उनके पास फिजिक्स विषय वैकल्पिक था लिहाजा उसकी उन्होंने कोचिंग ली। वह इस बात से बेहद खुश हैं कि इस बार दिल्ली की लड़कियों ने नतीजों में जलवा बिखेरा है।
वह कहती हैं कि हार से आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है लिहाजा हार से बिल्कुल न घबराएं। अब वह प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज की सेवा करना चाहती हैं।
2009 में किया इंजीनयरिंग
मालूम हो कि निधि ने विकासपुरी स्थित ऑक्सफोर्ड स्कूल से अपनी 12वीं की पढ़ाई की। उसके बाद द्वारका स्थित नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी (एनएसआईटी) से वर्ष 2009 में इंजीनयरिंग की।
उसके बाद एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम भी किया। वहां से अवकाश लेकर वह सिविल सेवा की तैयारी में जुट गई। उनके पिता मोहनलाल गुप्ता ग्रामीण विकास मंत्रालय में निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।
जबकि मां प्रियवंदा गृहिणी हैं। उनके बड़े भाई गुड़गांव स्थित केपीएमजी कंपनी में वित्तीय सलाहकार हैं।