नामी IFS अधिकारी ने कहा: मेरे पास काम नहीं, मुझे काम चाहिए
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एक तरफ सरकारी अधिकारियों पर काम न करने और काम में देरी करने का आरोप लगता है। वहीं, भारत सरकार का एक अधिकारी काम न मिलने से परेशान है। अधिकारी के पास से सारे कामकाज बिना कोई कारण बताए ले लिए गए हैं।
अधिकारी ने काम मांगने के लिए प्रधानमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री के साथ-साथ एम्स निदेशक से भी आग्रह किया लेकिन जब कोई काम नहीं मिला तब अधिकारी ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) का दरवाजा खटखटाया और कहा कि मुझे काम दिलाया जाए मैं खाली बैठा हूं।
अधिकारी की अर्जी को गंभीरता से लेते हुए कैट ने स्वास्थ्य मंत्रालय, एम्स निदेशक, केंद्रीय सतर्कता आयोग और एम्स के सीवीओ को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है।
एम्स में बतौर डिप्टी सेक्रेट्री तैनात भारतीय वन सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के पास इन दिनों कोई काम नहीं है। सबसे पहले 14 अगस्त 2014 को उनसे चीफ विजलेंस ऑफिसर (सीवीओ) का काम ले लिया गया था। इसके बाद 15 मई 2015 को उनके पास से बाकी बचे काम भी ले लिए गए।
कई बार मांग चुके हैं अपने लिए काम
संजीव की ओर से बार-बार स्वास्थ्य मंत्रालय के 23 जून 2011 के आदेश के अनुसार काम मांगा गया लेकिन न तो प्रधानमंत्री कार्यालय, न ही स्वास्थ्य मंत्रालय और न ही एम्स निदेशक की ओर से कोई सकारात्मक जवाब मिला।
इसके बाद संजीव ने कैट में अर्जी देकर काम देने की गुहार लगाई है। एम्स निदेशक एमसी मिश्रा ने कहा कि अभी भी संजीव चतुर्वेदी के पास एम्स में काम है।
संजीव की ओर से कैट में दी गई अर्जी में यह भी कहा गया है कि न तो उनका कैडर स्थानांतरण किया जा रहा है और न ही दिल्ली सरकार के आग्रह पर उन्हें दिल्ली भेजा जा रहा है।
तारीफों के बाद भी नहीं मिल रहा काम
एम्स में करोड़ों रुपये की लागत से बने अंडरग्राउंड पार्किंग और कनवर्जेंस ब्लॉक निर्माण पूरा होने के कछ महीने बाद ही उसमें निर्माण स्तर पर बड़ी खामियां सामने आई हैं। इस जांच से दूर रखने के लिए उन्हें बिना काम के रखा गया है।
जबकि मंत्रालय के 2011 के आदेश के अनुसार उन्हें जिम्मा दिया गया था कि संस्थान में जो निर्माण कार्य हो रहा है वह सही तरीके से और समय पर पूरा हो। संस्थान के प्रबंधन और नियंत्रण के काम के अलावा अनुशासनात्मक समितियों के साथ समन्वय बनाने का भी काम दिया गया था।
संजीव के काम की पूर्व के स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव और एम्स के वर्तमान निदेशक ने भी तारीफ की थी और इमानदार अधिकारी बताया।
बावजूद इनसे कोई काम नहीं लिया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक भारत सरकार में डिप्टी सेक्रेट्री रैंक के 88 अधिकारियों के पद खाली पड़े हैं और संजीव को बिना काम के रखा गया है।