पहले ही देना चाहता था इस्तीफा, PM ने रोक लिया: जंग
महज 3 साल, पांच महीने, 13 दिन के अपने कार्यकाल के बाद नजीब जंग ने दिल्ली के उपराज्यपाल के पद से बृहस्पतिवार(22 दिसंबर) को इस्तीफा दे दिया। लोग उनके इस फैसले से हैरान हुए लेकिन सबने उनके फैसले का सम्मानपूर्वक स्वागत किया।
अपने इस्तीफे के बाद एनडीटीवी से बातचीत में उन्होंने फिर दोहराया है कि उनके इस्तीफे के पीछे कोई राजनीति नहीं है। वो अपनी 95 साल की मां को ज्यादा से ज्यादा वक्त देना चाहते थे इसलिए ये कदम उठाया। साथ ही उन्होंने एक किताब भी लिखने की बात कही है।
वहीं उन्होंने अपनी बातचीत में ये खुलासा भी किया कि जब बीजेपी की सरकार लोकसभा चुनाव जीतकर सत्ता में आई तब उन्होंने अपने इस्तीफे की पेशकश की थी। लेकिन पीएम मोदी ने उन्हें अपने पद पर बने रहने के लिए कहा। उन्होंने तीन साल का कार्यकाल पूरा होने पर भी इस्तीफे की पेशकश की थी।
कई बार कोर्ट पहुंचा आप-एलजी का विवाद
नजीब जंग का यूं अचानक से इस्तीफा देना राजनीतिक गलियारों में लोगों को चौंका गया। ऐसा इसलिए क्योंकि चंद रोज पहले ही जंग ने केंद्र को पत्र लिखकर अवगत कराया था कि वह क्रिसमस के दौरान छुट्टी पर गोवा जा रहे हैं।
पिछले दो सालों में दिल्ली की आप सरकार और जंग के बीच टकराव कई बार अदालत के दरवाजे तक जा पहुंचा। इन सब के बीच इस अटकल को और बल मिला कि उनके इस्तीफे का संबंध दिल्ली की निर्वाचित सरकार की शक्तियों को लेकर अगले महीने आने वाले सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले से जुड़ा हो सकता है।
जंग ने कई बार केजरीवाल सरकार के फैसले को पलट दिया और सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में टिप्पणी की थी कि निर्वाचित सरकार के पास कुछ शक्तियां होनी चाहिए। पूर्व आईएएस अधिकारी नजीब जंग ने जुलाई, 2013 में उप राज्यपाल का पदभार संभाला था।