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Delhi: जानबूझ कर खतरा बढ़ा रहे बीपी के मरीज, दवा लेने से कर रहे परहेज

Wed, 17 May 2023 08:57 AM IST
विजय पुंडीर राकेश शर्मा, नई दिल्ली
राकेश शर्मा, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Wed, 17 May 2023 08:57 AM IST
सार

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण चार और पांच को आधार बनाकर किए गए इस शोध में 15 से 49 आयु वर्ग के 22.8 फीसदी लोग बीपी के मरीज पाए गए। इनमें से 52.06 फीसदी नए मरीज पाए गए थे। इन्हें पहले से पता था कि उनमें से केवल 40.7 फीसदी मरीज ही बीपी कम करने वाली दवाएं ले रहे थे। 

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Hypertension patients deliberately increasing their problem
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

उच्च रक्तचाप के मरीज जानबूझकर अपनी समस्या बढ़ा रहे हैं। मर्ज का पता होने के बाद भी वह दवा नहीं लेते हैं। ऐसे मरीजों की संख्या करीब 60 फीसदी है। इसका खुलासा एक शोध से हुआ है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण को इसका आधार बनाया गया है। विशेषज्ञ बताते हैं कि दवा से दूरी बनाने का नतीजा ब्रेन स्ट्रोक, हार्ट व किडनी फेल होने के तौर पर हो सकता है। इसके साथ शरीर के दूसरे अंगों पर भी घातक असर पड़ता है। 

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राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण चार और पांच को आधार बनाकर किए गए इस शोध में 15 से 49 आयु वर्ग के 22.8 फीसदी लोग बीपी के मरीज पाए गए। इनमें से 52.06 फीसदी नए मरीज पाए गए थे। इन्हें पहले से पता था कि उनमें से केवल 40.7 फीसदी मरीज ही बीपी कम करने वाली दवाएं ले रहे थे। 
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इन डॉक्टरों ने किया शोध
भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान, दिल्ली से जुड़े डॉ. सौरव बसु, डॉ. मानसी मलिक, डॉ. तनु आनंद, डॉ. अंगद सिंह ने हाइपरटेंशन कंट्रोल कास्केड एंड रीजनल प्रोफोमेंस इन इंडिया : ए रिपिटेड क्रास-सेक्सनल एनलाइसेंस (2015-2021) विषय पर एक शोध किया। इसमें पाया गया कि ये ऐसे लोग हैं, जिन्हें पहले से पता भा कि वह बीपी के मरीज हैं। इनमें से 40.7 फीसदी लोग बीपी कम करने की दवा ले रहे थे।

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नियमित दवा लेने वाले रोगियों में 73.7 फीसदी मरीजों में नियंत्रित रक्तचाप 
वहीं बीपी को कम करने वाली दवा लेने वाले रोगियों से 73.7 फीसदी मरीज में नियंत्रित रक्तचाप देखा गया। वहीं, पुरुषों की तुलना में महिलाएं, ग्रामीण व सामाजिक रूप से वंचित समूहों से संबंधित लोगों में जागरूकता न होने के कारण जानकारी होने के बाद भी उन्होंने अपना इलाज शुरू नहीं करवाया। इनकी स्थिति खराब दिखी। प्राइमस अस्पताल के वरिष्ठ विकास चोपड़ा का कहना है कि हाइपरटेंशन के कारण दिल की बीमारियां, हृदय अटैक, घातक दिमागी स्ट्रोक, गुर्दे की बीमारी सहित अन्य समस्याएं हो सकती हैं। बीपी की समस्या कई कारणों से हो सकती है। इसमें आनुवंशिक प्रभाव, खराब लाइफस्टाइल, बढ़ती उम्र, लगातार तनाव सहित अन्य शामिल हैं।  

हो सकते हैं दूसरे कारण भी
40 साल से कम उम्र के लोगों में बीपी की समस्या होने के लिए दूसरे कारण भी हो सकते हैं। यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेस व जीटीबी अस्पताल के मेडिसिन विभाग में प्रोफेसर डॉ अमितेश अग्रवाल का कहना है कि शोध में पाया गया है कि 40 साल से कम उम्र के लोगों में बीपी के लिए किडनी व हार्मोन की समस्या भी पाई गई है। ऐसे मरीजों में इन कारणों से संबंधित उपचार देने पर बीपी की समस्या भी अपने आप ही कम होने के संकेत मिले हैं। ऐसे में कम उम्र के मरीजों में यदि बीपी की समस्या पाई जाती है तो पहले दूसरे कारणों का पता लगाया जाता है। डॉ अग्रवाल ने कहा कि बीपी साइलेंट किलर है, जो दूसरी बीमारियों को जन्म देता है। कई बार मरीज को बीपी की समस्या का पता ही नहीं चल पाता और दूसरी बीमारी समस्या बन जाती है।

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