पतियों की गुहार, 'हमें हमारी पत्नियों से बचाओ'
दिल्ली सरकार के वुमन हेल्पलाइन नंबर-181 पर ऐसे फोन भी आते हैं, जिनमें पीड़ित कोई औरत नहीं बल्कि मर्द होते हैं। फोन करने वाले ऐसे ज्यादातर पुरुष चाहते हैं कि महिलाओं की तरह पुरुष हेल्पलाइन भी होनी चाहिए, क्योंकि अत्याचार केवल महिलाओं पर ही नहीं, पुरुषों पर भी हो रहे हैं।
अगर कुछ मामलों में महिलाएं अपने पति से छुटकारा पाना चाहती हैं, तो ऐसे मामले भी हैं जिनमें पति अपनी बीवी से पीछा छुड़ाना चाहते हैं। मगर उनकी समझ में नहीं आता कि वे क्या करें और कहां जाएं? महिलाओं और अपनी पत्नियों से पीड़ित होने की पुरुषों की इस तरह की लगभग तीन कॉल हर रोज इस हेल्पलाइन नंबर पर आ रही हैं।
वुमन की तरह ही हो मेल हेल्पलाइन नंबर
16 दिसंबर, 2012 को दिल्ली गैंग रेप कांड के बाद उसी साल 31 दिसंबर को शुरू की गई इस हेल्पलाइन में 11 नवंबर तक करीब 6.5 लाख फोन आ चुके हैं। इसमें करीब 2100 फोन पुरुषों ने किए हैं। पता लगा है कि इनमें से कुछ ने फोन करके कहा कि मैम! मेरी पत्नी मुझे तरह-तरह से प्रताड़ित करती है, परेशान करती है।
यहां तक कि कई बार उसने मेरे ऊपर हाथ भी उठा दिया है। उसने मेरा जीना हराम कर रखा है। तुम बताओ मैं क्या करूं? कई बार मेल कॉलर यह भी जानना चाहते हैं कि शादी के वक्त उन्होंने कोई दहेज नहीं लिया, मगर अब उसकी पत्नी और ससुराल वाले उसे अपने मां-बाप से अलग होने के लिए कहते हैं।
अलग न होने पर वह दहेज मांगने के आरोप में फंसाने की धमकी देते हैं। कुछ फोन भी आए हैं जिसमें फोन करने वाले यह भी कहा है कि कोई लड़की उसे बार-बार फोन करके परेशान कर रही है, वह उससे कैसे छुटकारा पाए? ऐसे मामलों में वुमन हेल्पलाइन से उन्हें 100 नंबर पर कॉल करके सहायता लेने के लिए कहा जाता है।