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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Husband's girlfriend accused of breaking up the relationship and demanded compensation of Rs 1 crore.

Delhi NCR News: पति की प्रेमिका पर रिश्ता तोड़ने का आरोप लगा मांगा एक करोड़ का हर्जाना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 21 Sep 2025 10:31 PM IST
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- हाईकोर्ट ने याचिका को अनुमति देते हुए कहा कि सिविल मुकदमा दायर किया जा सकता है
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। विवाहेतर संबंधों के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि कोई महिला अपने पति की प्रेमिका के खिलाफ प्रेम अलगाव (एलाइनेशन ऑफ एफेक्शन) के आधार पर सिविल मुकदमा दायर कर हर्जाना मांग सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि व्यभिचार को अपराधमुक्त करने का मतलब यह नहीं है कि तीसरे पक्ष को सिविल परिणामों से मुक्ति मिल जाए। एक मामले में पत्नी ने पति की प्रेमिका पर रिश्ता तोड़ने का आरोप लगाकर एक करोड़ का हर्जाना मांगा है।
न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की एकलपीठ ने इस मामले में पत्नी के दावे को सशर्त मान्य ठहराते हुए प्रेमिका से पक्ष रखने को कहा। पीठ ने कहा कि हिंदू मैरिज एक्ट या किसी अन्य वैवाहिक कानून में तीसरे पक्ष के कृत्यों के खिलाफ कोई स्पष्ट उपाय नहीं है। वैवाहिक कानून के अभाव में और किसी वैधानिक प्रतिबंध के बिना, तीसरे पक्ष के खिलाफ हर्जाने का सिविल मुकदमा सिविल कोर्ट में चलाया जा सकता है।
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महिला ने मांगा हर्जाना

एक महिला ने अपने पति की कथित प्रेमिका पर रिश्ता तोड़ने का आरोप लगाकर 1 करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा है। महिला का आरोप है कि प्रेमिका ने जानबूझकर उसके वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप किया, जिससे पति का स्नेह अलग हो गया और वैवाहिक संबंध टूट गए। पति और प्रेमिका ने मुकदमे को खारिज करने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता का प्रयोग अपराध नहीं है, इसलिए सरकार इसे दंडित नहीं कर सकती। यह व्यवहार सिविल परिणामों को जन्म दे सकता है। जोसेफ शाइन फैसले ने व्यभिचार को अपराधमुक्त किया, लेकिन विवाह से बाहर अंतरंग संबंध बनाने का लाइसेंस नहीं दिया, जो सिविल या कानूनी परिणामों से मुक्त हो।
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अदालत ने एलाइनेशन ऑफ एफेक्शन को एंग्लो-अमेरिकन कॉमन लॉ से लिया गया हार्ट-बाम टॉर्ट बताया, जो भारत में स्पष्ट रूप से मान्यता प्राप्त नहीं है। पीठ ने कहा कि कोई व्यक्ति विवाह के बाहर अंतरंग संबंध बनाने का पूर्ण अधिकार नहीं रखता।
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