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Delhi NCR News: पत्नी की हत्या में पति दोषी करार
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। साकेत कोर्ट ने पत्नी की गला घोंटकर हत्या करने के मामले में पति फजरुद्दीन उर्फ ननवा को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि मुख्य गवाहों के बयान से मुकरने के बावजूद मेडिकल रिपोर्ट, डीएनए और अन्य परिस्थितिजन्य सबूतों से आरोपी का अपराध साबित होता है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समर विशाल की अदालत ने यह फैसला सुनाया।मामला साल 2020 में दक्षिण दिल्ली के संगम विहार का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 4 फरवरी 2020 को फजरुद्दीन ने अपनी पत्नी शमीना की गला घोंटकर हत्या कर दी थी। उस समय दंपती शमीना की बहन के घर रह रहा था, जहां शमीना का किडनी की पथरी का इलाज चल रहा था। मृतका के बहनोई मोहम्मद ताहिर ने शुरुआत में पुलिस को बताया था कि उसने आरोपी को शमीना का गला दबाते हुए देखा था। हालांकि, सुनवाई के दौरान वह अपने बयान से मुकर गया। शमीना की बहन और अन्य परिजनों ने भी अपने पहले के बयान बदल दिए। अदालत ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक शमीना की मौत गला घोंटने से हुई थी। डॉक्टर की गवाही और आरोपी की शर्ट से मिले डीएनए का मृतका के खून के नमूने से मेल खाना भी अहम सबूत रहे। बचाव पक्ष ने कहा कि किसी ने हत्या होते नहीं देखी और हत्या का मकसद भी साबित नहीं हुआ। हालांकि, अदालत ने सभी सबूतों को एक साथ देखते हुए फजरुद्दीन को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी ठहराया।
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नई दिल्ली। साकेत कोर्ट ने पत्नी की गला घोंटकर हत्या करने के मामले में पति फजरुद्दीन उर्फ ननवा को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि मुख्य गवाहों के बयान से मुकरने के बावजूद मेडिकल रिपोर्ट, डीएनए और अन्य परिस्थितिजन्य सबूतों से आरोपी का अपराध साबित होता है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समर विशाल की अदालत ने यह फैसला सुनाया।मामला साल 2020 में दक्षिण दिल्ली के संगम विहार का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 4 फरवरी 2020 को फजरुद्दीन ने अपनी पत्नी शमीना की गला घोंटकर हत्या कर दी थी। उस समय दंपती शमीना की बहन के घर रह रहा था, जहां शमीना का किडनी की पथरी का इलाज चल रहा था। मृतका के बहनोई मोहम्मद ताहिर ने शुरुआत में पुलिस को बताया था कि उसने आरोपी को शमीना का गला दबाते हुए देखा था। हालांकि, सुनवाई के दौरान वह अपने बयान से मुकर गया। शमीना की बहन और अन्य परिजनों ने भी अपने पहले के बयान बदल दिए। अदालत ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक शमीना की मौत गला घोंटने से हुई थी। डॉक्टर की गवाही और आरोपी की शर्ट से मिले डीएनए का मृतका के खून के नमूने से मेल खाना भी अहम सबूत रहे। बचाव पक्ष ने कहा कि किसी ने हत्या होते नहीं देखी और हत्या का मकसद भी साबित नहीं हुआ। हालांकि, अदालत ने सभी सबूतों को एक साथ देखते हुए फजरुद्दीन को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी ठहराया।