राजनिवास पर धरना: सीएम केजरीवाल की मां व पत्नी को जाने से रोका, चौथे दिन चला चिट्ठीबाजी का दौर
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दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया का बृहस्पतिवार को भी आमरण अनशन जारी रहा। जैन की बीपी लो होने और शुगर का स्तर बढ़ने की सूचना पर मुख्यमंत्री की पत्नी सुनीता केजरीवाल और मां, सिसोदिया और जैन के परिवार के साथ राजनिवास की तरफ जा रही थीं, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें अंदर जाने की इजाजत नहीं दी।
बाद में सुनीता ने ट्वीट किया कि चार महिलाओं के साथ वह राजनिवास जा रही थीं, लेकिन उन्हें अंदर जाने की इजाजत नहीं दी। उन्होंने उपराज्यपाल से दखल देने की गुजारिश की है।
इस पर संजय सिंह ने लिखा कि केजरीवाल की पत्नी और मां को उनसे मिलने नहीं दिया गया। सत्येंद्र की पत्नी को नहीं मिलने दिया गया। यह समझ से बाहर है कि आखिर इनका अपराध क्या है। परिवार को भी मिलने नहीं दिया जा रहा है।
राजनिवास में धरने के चौथे दिन चिट्ठीबाजी
राजनिवास में धरने के चौथे दिन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले में दखल देने की मांग की है। वहीं, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया व सांसद संजय सिंह ने उपराज्यपाल को खत लिखकर गतिरोध दूर करने के अलावा मिलने के लिए भी समय मांगा है। इस बीच दिल्ली सरकार के दो मंत्रियों का राजनिवास में अनशन जारी रहा। दोनों की हालत फिलहाल सामान्य बताई जा रही है।
अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में लिखा है कि देश के इतिहास में पहली बार बीते तीन महीने से दिल्ली के आईएएस अधिकारी हड़ताल पर हैं। वह मंत्रियों की बैठकों में नहीं आते। इससे दिल्ली के कई कामों पर असर पड़ रहा है।
अधिकार क्षेत्र से बाहर होने की वजह से अधिकारियों की हड़ताल दिल्ली सरकार खत्म नहीं करवा पा रही है। यह दिल्ली सरकार के अधीन होते तो इनकी हड़ताल 24 घंटों में खत्म हो गई होती। वहीं, दिल्ली सरकार की बार-बार गुुजारिश के बाद भी उपराज्यपाल हड़ताल खत्म नहीं करवा रहे हैं।
केजरीवाल ने पत्र में उन कामों की लिस्ट भी दी है, जिन पर हड़ताल की वजह से असर पड़ा है। केजरीवाल ने पत्र में कहा है कि प्रधानमंत्री व उपराज्याल ही हड़ताल खत्म करवा सकते हैं। केजरीवाल ने लिखा है कि चूंकि अभी तक उपराज्यपाल ने इस दिशा में कोई काम नहीं किया है, लिहाजा प्रधानमंत्री को हड़ताल खत्म करवानी चाहिए।
प्रभावित कामों की सूची
-बारिशों के पहले नालों की सफाई होनी है। लेकिन अधिकारियों के बैठक में न आने से काम पूरा नहीं हो सका है।
-डेंगू और चिकनगुनिया की तैयारी भी प्रभावित हुई है।
-स्कूलों की रंगाई-पुताई का काम अधूरा पड़ा है।
-नए मोहल्ला और पॉली क्लीनिक बनने का काम बिलकुल बंद है।
-दिल्ली के सिग्नेचर ब्रिज की आखिरी किश्त जानी है। लेकिन अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे हैं।
-कच्ची कालोनियों में चल रहे गली नाली के सारे काम या तो ठप हो गए हैं या धीमे हो गए हैं।
-हर 15 दिनों में प्रदूषण की समीक्षा एवं प्लानिंग के लिए होने वाली बैठक बीते 3 महीनों से नहीं हो सकी है।
मनीष सिसोदिया और संजय सिंह का पत्र
‘अफसर बात न करें तो प्रदूषण से कैसे निपटेंगे’
मनीष सिसोदिया ने उपराज्यपाल को लिखे पत्र में कहा है कि सोमवार की बैठक में उपराज्यपाल ने कहा था कि अधिकारियों की हड़ताल खत्म कराने में अभी समय लगेगा। बीते चार दिनों से मुख्यमंत्री व उनके तीन मंत्री उपराज्यपाल के जवाब का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच दिल्ली में धुंध की समस्या गंभीर रूप से बढ़ गई है। अगर आईएएस अधिकारी फोन पर मंत्रियों से बात नहीं करेंगे, बैठकों में नहीं आएंगे तो ऐसी विषम परिस्थिति से कैसे निपटा जा सकता है। सिसोदिया ने उम्मीद जताई है कि उपराज्यपाल जल्द हड़ताल करवा देंगे। तब तक उन्होंने इंतजार करने के लिए बात कही है। इसके अलावा सिसोदिया ने प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए उपराज्यपाल से मुलाकात का समय भी मांगा है।
संजय सिंह का पत्र
‘मुख्यमंत्री से मिलने की इजाजत क्यों नहीं’
संजय सिंह ने उपराज्यपाल को पत्र में लिखा है कि वह बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात करने के लिए राजनिवास जा रहे थे। लेकिन पुलिस ने उन्हें अंदर जाने की इजाजत नहीं दी। उन्होंने सवाल किया कि क्या मुख्यमंत्री समेत उनके मंत्रियों को राजनिवास में नजरबंद कर दिया गया है। ऐसा न होने पर एक सांसद को मुख्यमंत्री से मिलने की इजाजत क्यों नहीं दी गई। संजय ने उपराज्यपाल के निजी सचिव से भी इस बारे में बात की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा लग रहा है कि वह दिल्ली के नहीं, भाजपा के उपराज्यपाल बन गए हैं। पत्र में संजय सिंह ने उपराज्यपाल से मुलाकात का वक्त मांगा है।