फिल्म ग्रैंड मस्ती से हटाए दोहरे अर्थ व अश्लील संवाद
बॉलीवुड फिल्म ग्रैंड मस्ती को टीवी पर दिखाने के लिए आपत्तिजनक 218 दृश्यों व डॉयलाग को काटा गया है और फिल्म को नए
सिरे से यूए प्रमाणपत्र प्रदान किया गया है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, केंद्रीय बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) ने हाईकोर्ट को यह जानकारी दी। अदालत ने इस मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी व न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ टीवी चैनल पर फिल्म दिखाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है।
वहीं दूसरी तरफ चैनल ने तर्क रखा है कि बॉलीवुड फिल्म ग्रैंड मस्ती को टीवी पर देखना हर बालिग का अधिकार है। उसके इस अधिकार पर रोक लगाना गलत है। ऐसे में फिल्म दिखाने पर लगाई गई रोक को हटाया जाए।
'फिल्म का बच्चों पर पड़ेगा बुरा असर'
स्थाई अधिवक्ता ने कहा कि फिल्म को नए सिरे से प्रमाणपत्र देने से पहले जनवरी माह में दोहरे अर्थ, अश्लील संवाद, दृश्यों, महिलाओं के प्रति अश्लीलता संबंधी 218 दृश्यों को हटा दिया गया है।
खंडपीठ इदारा गोपीचंद की याचिका पर सुनवाई कर रही है। याची के अधिवक्ता गौरव बंसल ने खंडपीठ को बताया था कि फिल्म में दोहरे अर्थ वाले डायलॉग हैं और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया है, जिससे समाज और खास कर बच्चों पर इसका बुरा असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि फिल्म को यू/यूए सर्टिफिकेट दिया गया है और नियमों के अनुसार इस फिल्म को चैनल नहीं दिखा सकते हैं। वहीं जी सिनेमा ने जवाब में कहा कि उसने इस फिल्म के अधिकार खरीदने व टीवी चैनल पर दिखाने के लिए चार करोड़ रुपये खर्च किए है।
फिल्म को अगस्त माह में टीवी पर दिखाया जाना था और इस कारण उसे काफी आर्थिक नुकसान हुआ है। उसने कहा कि फिल्म को सीबीएफसी से प्रमाणपत्र मिला है और उसे देखना हर बालिग का मौलिक अधिकार है। अत: फिल्म पर लगाई गई रोक को हटाया जाए।