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केजरीवाल सरकार में ऐसी कैसी अंधेरगर्दी?

Wed, 05 Feb 2014 10:22 PM IST
विनोद डबास/ अमर उजाला, नई दिल्ली
विनोद डबास/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 05 Feb 2014 10:22 PM IST
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huge scam in army farm building in kejriwal government

दिल्ली हाईकोर्ट की रोक के बाद सैनिक फार्म में अवैध निर्माण होने पर दक्षिणी दिल्ली नगर निगम बुरी तरह फंस गया है।

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उप राज्यपाल ने अवैध निर्माण पर संज्ञान लेते हुए उसके पीछे जिम्मेदार अधिकारियों के बारे में मालूम करने के लिए प्रधान सचिव (गृह) की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया है।

कमेटी में उनके अलावा पांच अन्य सदस्य शामिल किए है। इनमें एक नगर निगम और चार दिल्ली सरकार के अधिकारी है।

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सैनिक फार्म में अवैध निर्माण होने का मामला नगर निगम में पिछले चार माह से चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मसले को लेकर आयुक्त एवं एक अतिरिक्त आयुक्त के बीच टकराव जगजाहिर है और यह मसला उपराज्यपाल के दरबार में भी पहुंचा है।
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सूत्रों के अनुसार बहुचर्चित सैनिक फार्म में अवैध निर्माण होने के मामले में इलाके के चार इंजीनियर, उपायुक्त और आयुक्त पर भी गाज गिर सकती है। क्योंकि जोन के प्रभारी अतिरिक्त आयुक्त ने सैनिक फार्म में अवैध निर्माण होने का खुलासा करने के साथ-साथ इलाके के संबंधित इंजीनियर्स के खिलाफ कार्रवाई करने की आयुक्त से सिफारिश की थी।

मगर उनकी सिफारिश पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इतना ही नहीं, इंजीनियर्स ने अवैध निर्माण के संबंध में रिपोर्ट बदल दी। इसी बीच यह मामला विपक्ष के नेता फरहाद सूरी ने स्थाई समिति की बैठक में उठा दिया, इसके चलते अवैध निर्माण का मामला मीडिया में प्रकाशित हो गया जिस पर उपराज्यपाल ने संज्ञान लेते हुए नगर निगम से रिपोर्ट मांगी।

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सूत्रों के अनुसार नगर निगम के अधिकारियों उपराज्यपाल के पास भी गलत रिपोर्ट भेज दी। इसी बीच अतिरिक्त आयुक्त ने उपराज्यपाल को स्थिति से अवगत कराते हुए गलत रिपोर्ट देने वाले अधिकारियों की पोल खोल दी। इसको लेकर उपराज्यपाल ने कड़ा रूख किया और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने के लिए एक कमेटी बनाने का फैसला किया।


उपराज्यपाल के निर्देश पर प्रधान सचिव की अगुवाई में बनी कमेटी में दिल्ली सरकार के सतर्कता विभाग के सचिव/निदेशक, पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता, राजस्व विभाग के दक्षिण जिला के उपायुक्त, दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के सतर्कता विभाग के निदेशक को सदस्य बनाया गया है।

जबकि दिल्ली सरकार के शहरी विकास विभाग के विशेष सचिव को सदस्य सचिव होंगे। सूत्रों के अनुसार नगर निगम से जुड़े किसी भी कार्य की जांच के लिए ऐसी उच्च स्तरीय कमेटी पहली बार बनाई गई है।

उधर, कमेटी के गठन के बाद नगर निगम के तमाम अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। उनको लग रहा है कि कमेटी की गाज कई अधिकारियों पर गिरेगी। उनमें आयुक्त भी शामिल हो सकते है। क्योंकि अवैध निर्माण के बारे में जानकारी होने के बावजूद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।

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