अधिकारियों को एक काम के लिए मिल रहे दो आदेश
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दिल्ली सरकार में उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच जंग का असर कृषि भूमि की रजिस्ट्री पर साफ दिख रहा है। राजस्व विभाग ने उपराज्यपाल या कैबिनेट में से एक का आदेश मानने की बजाय दोनो का आदेश मानने का फैसला किया है।
मुख्यालय की तरफ से सभी सब-रजिस्ट्रार को कृषि भूमि अधिसूचना, उपराज्यपाल की तरफ से उसे स्टे करने के निर्देश और फिर दिल्ली कैबिनेट का अधिसूचना लागू करने के फैसले की प्रति भेज दी गई है।
सरकार ने कृषि भूमि का सर्किल रेट तीन गुना तक बढ़ाया था। सूत्र बताते हैं कि सब रजिस्ट्रार लिखित में यह बेशक नहीं गया है कि उपराज्यपाल का निर्देश माने या कैबिनेट का फैसला? लेकिन मौखिक तौर पर कह दिया गया है कि दोनो को लागू करो।
अगर कोई व्यक्ति कृषि योग्य भूमि की खरीद-फरोख्त नए सर्किल रेट से कराया चाहता है तो उसे उसी दर पर रजिस्टर करो। लेकिन कोई व्यक्ति उपराज्यपाल के आदेश का हवाला देकर पुरानी दर से रजिस्ट्री चाहता है तो उसी दर से रजिस्ट्री कर दें।
दोनो आदेश के हिसाब से रजिस्ट्री की जा रही है
हालांकि पुरानी दर से रजिस्ट्री कराए जाने पर स्टॉम्प कलेक्टर के पास मामला भेजा जा रहा है। दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्टॉम्प ड्यूटी कलेक्शन कानून में दो साल तक स्टॉम्प ड्यूटी की बकाया राशि लेने या वापस किए जाने का प्रावधान है।
मामला स्टॉम्प कलेक्टर के पास जाने पर वहां निपटारा नहीं होता है तो यह केस मंडलायुक्त के पास पहुंच जाएगा। यहां भी मामला नहीं निपटने की दशा में रजिस्ट्री कराने वाला व्यक्ति या विभाग कोर्ट में मामला ले जा सकता है।
राजस्व विभाग के अधिकारी बताते हैं कि उपराज्यपाल व कैबिनेट में से किसका आदेश माना जाए, इसका अंतिम फैसला कोर्ट में पहुंचे बिना होता नहीं दिख रहा है। दोनो आदेश के हिसाब से रजिस्ट्री की जा रही है।