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जानिए नवजात बच्चों के लिए कितनी खतरनाक है दिवाली की आतिशबाजी और कैसे करें बचाव
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 30 Oct 2016 12:08 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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दिवाली में आतिशबाजी के बच्चों खासकर नवजात का विशेष ख्याल रखें, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही से खुशियों के त्योहार में खलल पड़ सकता है। आतिशबाजी की करकस आवाज से अपने नवजात को बचा कर रखें, क्योंकि तेज आवाज से नवजात के दिमाग पर असर पड़ने का खतरा रहता है।
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आतिशबाजी की तेज आवाज से न सिर्फ दिमाग पर असर का खतरा रहता है बल्कि आतिशबाजी के दौरान निकले केमिकल्स से एलर्जी का भी खतरा रहता है। दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के कान, नाक और गला विभाग के डॉ.सौरभ जैन ने बताया कि अत्यधिक तेज आवाज बच्चों के दिमाग पर असर पड़ सकता है।
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आतिशबाजी की वजह से वातावरण में फैले केमिकल्स और धुएं की वजह से ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। इससे नवजात की हृदय गति घटती-बढ़ती रहती है और पल्स रेट में भी उतार-चढ़ाव होता रहता है।
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पटाखे
ऐसे में नवजात के दिमाग पर असर पडने का खतरा रहता है। लिहाजा नवजात को जितना संभव हो आतिशबाजी की तेज आवाज से दूर रखना चाहिए। आतिशबाजी के धुएं और केमिकल्स से एलर्जी का भी खतरा रहता है।
सर गंगाराम अस्पताल के ईएनटी विभाग के कंसलटेंट डॉ. आलोक अग्रवाल ने बताया कि 50 डेसिबल से अधिक आवाज नवजात के कान असर डालता है। तेज आवाज की वजह से नवजात के सुनने की क्षमता कमजोर होने का खतरा रहता है।
बच्चों में चिड़चिड़ापन और भूख न लगने की प्रवृति भी विकसित हो सकती है। वयस्कों में 100 डेसिबल से ज्यादा की आवाज खतरनाक मानी जाती है। सेंटर फार साइट के निदेशक डॉ. महिपाल सचदेव का कहना है कि आतिशबाजी के दौरान बड़ों में भी आंखों में कट, सुपरफिशियल एब्रेशन, ग्लोब इंजूरी, केमिकल एंड थर्मल बर्न हो सकता है।
सर गंगाराम अस्पताल के ईएनटी विभाग के कंसलटेंट डॉ. आलोक अग्रवाल ने बताया कि 50 डेसिबल से अधिक आवाज नवजात के कान असर डालता है। तेज आवाज की वजह से नवजात के सुनने की क्षमता कमजोर होने का खतरा रहता है।
बच्चों में चिड़चिड़ापन और भूख न लगने की प्रवृति भी विकसित हो सकती है। वयस्कों में 100 डेसिबल से ज्यादा की आवाज खतरनाक मानी जाती है। सेंटर फार साइट के निदेशक डॉ. महिपाल सचदेव का कहना है कि आतिशबाजी के दौरान बड़ों में भी आंखों में कट, सुपरफिशियल एब्रेशन, ग्लोब इंजूरी, केमिकल एंड थर्मल बर्न हो सकता है।
तेज आवाज से बचने के लिए क्या करें?
आतिशबाजी करते समय तीन एम का चश्मा लगाना चाहिए और आतिशबाजी जलाने के लिए अगरबत्ती का उपयोग करें और जहां तक संभव खुले स्थान पर आतिशबाजी करें और उस जगह पर एक बाल्टी पानी जरूर रखें।
किसी भी दुर्घटना की स्थिति में आंखों को ठंडे पानी से लगातार 15 मिनट तक धोते रहें और यदि कटने का कोई निशान हो तो पानी से न धोएं। यदि आंखों से पानी आने लगे या लाल होने लगे और जलन हो तो तुरंत डॉक्टर से दिखाएं। अपने मन से कोई दवा आंख में न डालें और न खाएं।
. आतिशबाजी के दौरान कॉटन में सरसों तेल लगाकर कान में लगाएं।
. तेज आवाज वाले पटाखों से परहेज करें।
. घर के दरवाजे और खिड़की बंद करके रखें।
. तेज आवाज से कोई दिक्कत हो तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें।
किसी भी दुर्घटना की स्थिति में आंखों को ठंडे पानी से लगातार 15 मिनट तक धोते रहें और यदि कटने का कोई निशान हो तो पानी से न धोएं। यदि आंखों से पानी आने लगे या लाल होने लगे और जलन हो तो तुरंत डॉक्टर से दिखाएं। अपने मन से कोई दवा आंख में न डालें और न खाएं।
. आतिशबाजी के दौरान कॉटन में सरसों तेल लगाकर कान में लगाएं।
. तेज आवाज वाले पटाखों से परहेज करें।
. घर के दरवाजे और खिड़की बंद करके रखें।
. तेज आवाज से कोई दिक्कत हो तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें।