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भूकंप के खतरे से बचने के लिए काम के हैं ये उपाय

Tue, 28 Apr 2015 03:28 PM IST
Updated Tue, 28 Apr 2015 03:28 PM IST
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How to prevent earth quake

नेपाल का भूकंप बेशक दिल्ली वासियों को डरा रहा है। भूकंप के लिहाज से संवेदनशीन जोन में बसी राजधानी में फिक्र अपने मकानों को लेकर है। लेकिन थोड़ी एहतियात हमें सुकून दे सकती है।

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विशेषज्ञ बताते हैं कि तकनीक मौजूद है। आठ तीव्रता का कंपन झेलने वाली इमारतें हमारे देश में तैयार हो सकती हैं। वहीं, पुरानी इमारतों को भी भूकंपरोधी बनाया जा सकता है।
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भूकंप विशेषज्ञ मानते हैं कि ईंट व सीमेंट के सहारे खड़ी इमारतें कंपन नहीं झेल सकतीं। भूकंप आने पर सबसे ज्यादा खतरा पिलरविहीन इमारतों को रहता है। इस दौरान पिलर पर खड़ी इमारत एक साथ हिलती है।
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जबकि बिना पिलर की इमारत की चारों दीवारों में कंपन अलग-अलग होता है। इससे इमारत गिरने का खतरा रहता है। इसे ध्यान में रखकर ही नेशनल बिल्डिंग कोड तैयार किया गया है।

कैसे हो सकती है हिफाजत

How to prevent earth quake

नई इमारतों के निर्माण में सबसे पहले मिट्टी व भूजल की जांच की जाती है। इसके आधार पर बुनियाद में भूकंपरोधी स्ट्रक्चर डाला जाता है।

फिर, बीम और कॉलम के सहारे इमारत खड़ी होती है। कॉलम में लगा स्टील का सरिया इमारत को कंपन से बचाता है। जबकि बीम की आरसीसी उसे मजबूती देती है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट में जियो हेजार्ड रिस्क मैनेजमेंट डिवीजन के हेड चंदन घोष बताते हैं कि हमारी डिजाइन सात से आठ तीव्रता का भूकंप झेल सकती है।

छोटे-छोटे मकानों से लेकर बहुमंजिला इमारतों तक के लिए तकनीक मौजूद है। यहां तक कि पुरानी इमारतों को भूकंप रोधी बनाया जा सकता है। खास बात यह कि इसमें ज्यादा खर्च भी नहीं आता।

पुराने भवनों को भूकंपरोधी बनाना

How to prevent earth quake

फिलहाल पुरानी इमरतों को भूकंपरोधी बनाया जा सकता है। इसका जरिया रेट्रोफिटिंग तकनीक है। इसके तहत पिलरविहीन इमारतों में दरवाजों और खिड़कियों के ऊपर लिंटर बैंड डाला जाता है।

वहीं, चारों दीवारों के कोनों को लिंटर बैंड से आपस में जोड़ दिया जाता है। लिंटर बैंड में स्टील की छड़ें इस्तेमाल होती हैं। इनसे मजबूती भी आती है। इससे 80 फीसदी तक भूकंप का खतरा कम हो जाता है। रेट्रोफिटिंग तकनीक भारतीय मानक ब्यूरो से मान्यता प्राप्त है।

बगैर इजाजत नहीं बन सकतीं बहुमंजिला इमारतें
सरकारी और बहुमंजिला इमारतों के लिए नेशनल बिल्डिंग कोड मानना जरूरी है। जेपी ग्रुप के डायरेक्टर मनोज गौर बताते हैं कि बहुमंजिला इमारतों का डिजाइन स्ट्रक्चरल इंजीनियर से पास कराना जरूरी होता है।

इसके बगैर नक्शा ही पास नहीं होता। वहीं, इमारत तैयार होने के बाद भी कंप्लीशन सर्टिफिकेट लेना होता है। सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही मकान आवंटित हो सकता है।

कई मामलों में मंजूरी बन जाती औपचारिकता

How to prevent earth quake

दूसरी तरफ भूकंप विशेषज्ञ बताते हैं कि छोटी इमारतों में मानकों की अनदेखी होती है। सरकारी इमारतों में भी कई बार इसकी अनदेखी की जाती है। मानक सिर्फ टेंडर पास करने की औपचारिकता भर साबित होते हैं। इसके बाद डेवलपर्स अपनी मर्जी से निर्माण करता है।

दिया जाता है मुफ्त प्रशिक्षण
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट न सिर्फ मकानों की डिजाइन तैयार करता है, बल्कि इसमें लगने वाले मानवीय संसाधन को प्रशिक्षित भी करता है। चंदन घोष बताते हैं कि डिजाइन तैयार करने के बाद हम ठेकदार समेत उसकेपूरे स्टॉफ को मुफ्त में ट्रेनिंग भी देते हैं। पिछले कुछ वर्षों में जागरूकता बढ़ी है। हालांकि इसे पर्याप्त नहीं माना जा सकता।

भूकंपीय जोन चार में बसी राजधानी
भूकंपीय खतरे के हिसाब से देश पांच जोन में बंटा है। जोन पांच बेहद संवेदनशील है। जबकि जोन चार में स्थित राजधानी संवदेनशील है। यहां भूकंप आने का खतरा बना रहता है।

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