'निर्दोष युवकों के जेल जाने पर कैसा दशहरा और कैसी दीपावली'
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इकलाख हत्याकांड के बाद हुए बवाल में दस आरोपी युवकों के जेल जाने के बाद परिवार के लोग खामोश हैं। इस बार दशहरा मनाने को लेकर ग्रामीण मौन हैं।
उनका कहना है कि बिना जांच किए ही गांव के निर्दोष युवकों को जेल भेज दिया। ऐसे में कैसा दशहरा और कैसी दीपावली। दादरी के जारचा थाना क्षेत्र के बिसाहड़ा गांव में इकलाख की हत्या के बाद हुए तनाव को सामान्य करने के लिए प्रशासन ने हर स्तर पर बैठक की।
कुछ लोग नामजद किए गए युवकों को निर्दोष होने की बात करते हुए जांच कराने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से भी मिले थे। पुलिस अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
दशहरे को लेकर ग्रामीणों ने चुप्पी साध ली
आरोपी युवकों के जेल जाने से गांव में खामोशी है। वहीं पुलिस को पांच अज्ञात युवकों की तलाश है। वे युवक कौन हैं, इसे लेकर भी गांव में डर का माहौल बना हुआ है।
दशहरे को लेकर ग्रामीणों ने चुप्पी साध ली। उन्होंने दबी जुबान में कहा कि पुलिस जिन युवकों को जांच के नाम पर घर से ले गई उन्हें ही आरोपी बनाकर जेल भेज दिया।
ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि जिस गांव के दस युवक जेल में हो वहां कैसा दशहरा और कैसी दीपावली। ऐसे माहौल में कौन दीपावली या दशहरा मना सकता है। इसे लेकर बच्चों में भी उत्साह नहीं है।