{"_id":"6ae8b5c801f3748a6c0d1c02","slug":"how-different-are-green-firecrackers-from-conventional-ones-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-161906-2026-11-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: ग्रीन पटाखे सामान्य से कितने अलग, धुआं कम लेकिन प्रदूषण से पूरी तरह राहत नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: ग्रीन पटाखे सामान्य से कितने अलग, धुआं कम लेकिन प्रदूषण से पूरी तरह राहत नहीं
विज्ञापन
-सीएसआईआर-नीरी ने विकसित की है कम उत्सर्जन वाली तकनीक, तीन श्रेणियों में तैयार होते हैं ग्रीन पटाखे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिवाली पर पटाखे खरीदने बाजार जा रहे हैं तो इस बार सिर्फ कीमत और आवाज ही नहीं, उनकी पहचान भी जरूर जांच लें। ग्रीन पटाखों के नाम पर सामान्य पटाखों की बिक्री की आशंका के बीच खरीदारों के लिए असली और नकली की पहचान करना जरूरी है। ग्रीन पटाखे सामान्य पटाखों का ऐसा विकल्प हैं, जिन्हें जलाने पर प्रदूषणकारी तत्वों का उत्सर्जन अपेक्षाकृत कम होता है। हालांकि, इन्हें जलाने से भी धुआं और आवाज निकलती है। यानी ये प्रदूषण मुक्त नहीं, बल्कि कम प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे हैं।
सामान्य पटाखों से अलग है निर्माण की तकनीक
सामान्य पटाखों में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक पदार्थ जलने के बाद हवा में धुआं और प्रदूषक कण छोड़ते हैं। वहीं, ग्रीन पटाखों में रासायनिक मिश्रण और निर्माण प्रक्रिया में बदलाव किया जाता है, ताकि प्रदूषणकारी उत्सर्जन कम हो सके। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान ने इस दिशा में तकनीक विकसित की है। सामान्य पटाखों के मुकाबले इनके उत्सर्जन में करीब 30 फीसदी तक कमी का दावा किया जाता है।
तीन श्रेणियों में तैयार होते हैं ग्रीन पटाखे
ग्रीन पटाखों की तीन प्रमुख श्रेणियां स्वास, स्टार और सफल हैं। स्वास तकनीक में पानी छोड़ने की व्यवस्था होती है, जिससे धूल के कणों को कम करने में मदद मिलती है। स्टार श्रेणी के पटाखों को कम उत्सर्जन के उद्देश्य से विकसित किया गया है, जबकि सफल श्रेणी में भी प्रदूषणकारी तत्वों को कम करने पर जोर दिया जाता है।
विज्ञापन
पैकेट पर ग्रीन रंग देखकर न करें भरोसा
प्रमाणित ग्रीन पटाखों के पैकेट पर क्यूआर कोड होना जरूरी है। इसे मोबाइल से स्कैन करने पर निर्माता, उत्पाद और प्रमाणन से जुड़ी जानकारी मिलनी चाहिए। उत्पाद का राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान से प्रमाणित और पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन से लाइसेंस प्राप्त होना जरूरी है।
पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं ग्रीन पटाखे
ग्रीन पटाखे जलाने से भी धुआं, गैस और आवाज निकलती है। इनका इस्तेमाल प्रदूषण कम करने का विकल्प जरूर है, लेकिन इससे वायु और ध्वनि प्रदूषण का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता। बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों पर इसका असर पड़ सकता है। इसलिए पटाखे खरीदते समय प्रमाणन जांचने के साथ सावधानी बरतना भी जरूरी है। बेरियम वाले पटाखों और पटाखों की लड़ियों पर प्रतिबंध है।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिवाली पर पटाखे खरीदने बाजार जा रहे हैं तो इस बार सिर्फ कीमत और आवाज ही नहीं, उनकी पहचान भी जरूर जांच लें। ग्रीन पटाखों के नाम पर सामान्य पटाखों की बिक्री की आशंका के बीच खरीदारों के लिए असली और नकली की पहचान करना जरूरी है। ग्रीन पटाखे सामान्य पटाखों का ऐसा विकल्प हैं, जिन्हें जलाने पर प्रदूषणकारी तत्वों का उत्सर्जन अपेक्षाकृत कम होता है। हालांकि, इन्हें जलाने से भी धुआं और आवाज निकलती है। यानी ये प्रदूषण मुक्त नहीं, बल्कि कम प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे हैं।
सामान्य पटाखों से अलग है निर्माण की तकनीक
सामान्य पटाखों में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक पदार्थ जलने के बाद हवा में धुआं और प्रदूषक कण छोड़ते हैं। वहीं, ग्रीन पटाखों में रासायनिक मिश्रण और निर्माण प्रक्रिया में बदलाव किया जाता है, ताकि प्रदूषणकारी उत्सर्जन कम हो सके। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान ने इस दिशा में तकनीक विकसित की है। सामान्य पटाखों के मुकाबले इनके उत्सर्जन में करीब 30 फीसदी तक कमी का दावा किया जाता है।
विज्ञापन
तीन श्रेणियों में तैयार होते हैं ग्रीन पटाखे
ग्रीन पटाखों की तीन प्रमुख श्रेणियां स्वास, स्टार और सफल हैं। स्वास तकनीक में पानी छोड़ने की व्यवस्था होती है, जिससे धूल के कणों को कम करने में मदद मिलती है। स्टार श्रेणी के पटाखों को कम उत्सर्जन के उद्देश्य से विकसित किया गया है, जबकि सफल श्रेणी में भी प्रदूषणकारी तत्वों को कम करने पर जोर दिया जाता है।
विज्ञापन
पैकेट पर ग्रीन रंग देखकर न करें भरोसा
प्रमाणित ग्रीन पटाखों के पैकेट पर क्यूआर कोड होना जरूरी है। इसे मोबाइल से स्कैन करने पर निर्माता, उत्पाद और प्रमाणन से जुड़ी जानकारी मिलनी चाहिए। उत्पाद का राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान से प्रमाणित और पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन से लाइसेंस प्राप्त होना जरूरी है।
पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं ग्रीन पटाखे
ग्रीन पटाखे जलाने से भी धुआं, गैस और आवाज निकलती है। इनका इस्तेमाल प्रदूषण कम करने का विकल्प जरूर है, लेकिन इससे वायु और ध्वनि प्रदूषण का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता। बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों पर इसका असर पड़ सकता है। इसलिए पटाखे खरीदते समय प्रमाणन जांचने के साथ सावधानी बरतना भी जरूरी है। बेरियम वाले पटाखों और पटाखों की लड़ियों पर प्रतिबंध है।