20 सालों से यमुना में गंदगी बहा रहा होटल, डीपीसीसी ने हाईकोर्ट को दी जानकारी
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दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने हाईकोर्ट को बताया कि राजधानी में चल रहे कृष्णा कोंटीनेटल होटल पिछले करीब 20 वर्षों से यमुना नदी में होटल की गंदगी बहा रहा है और इससे पर्यावरण को काफी नुकसान हुआ है।
डीपीसीसी ने अदालत से होटल प्रबंधन की उस याचिका को खारिज करने का आग्रह किया, जिसमें उसने लगाए गए जुर्माने को चुनौती दी है। वहीं होटल प्रबंधन ने डीपीसीसी के जुर्माना लगाने के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया। अदालत ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ के समक्ष डीपीसीसी के अधिवक्ता ने कहा कि होटल वर्ष 1993 से चल रहा है और होटल प्रबंधन ने होटल से निकलने वाली गंदगी के निपटान के लिए ट्रीटमेंट प्लांट तक नहीं लगाया है।
हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
पूरी गंदगी यमुना में गिराई जा रही है और पर्यावरण को खराब किया जा रहा है। यह एक गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि इसी के ध्यानार्थ होटल पर 40 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया था और हाईकोर्ट के सिंगल जज ने होटल प्रबंधन की याचिका खारिज कर दी थी।
ऐसे में होटल प्रबंधन की अपील खारिज की जाए। वहीं दूसरी तरफ होटल की और से पेश अधिवक्ता ने डीपीसीसी द्वारा जुर्माना लगाने के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि डीपीसीसी को इस प्रकार से जुर्माना लगाने का अधिकार ही नहीं है।
उन्होंने कहा कि वे हर प्रकार के टैक्स का भुगतान कर रहे है और उसके बाद किसी भी प्रकार का जुर्माना गैरकानूनी है। खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि वे इस मामले में जल्द ही अपना फैसला सुनाएंगे।