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संस्कृत आचार्यों में जगी नौकरी की आस, 2012 में लगा था प्रतिबंध

Sun, 31 Jan 2016 02:34 PM IST
मुकेश शर्मा/अमर उजाला, गुड़गांव
मुकेश शर्मा/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Sun, 31 Jan 2016 02:34 PM IST
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hope for sanskrit teachers in haryana

बल्लभगढ़।

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संस्कृत आचार्यों पर मनोहर सरकार मेहरबान है। कैथल में आयोजित संस्कृत सम्मेलन में बकायदा शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा ने इस संबंध में बयान दिया है।

इस बयान से संस्कृत अध्यापकों के पदोन्नति से लेकर नेट, पीएचडी करने के रास्ते खुल सकते हैं। साथ ही निर्जीव संस्कृत कॉलेजों को दोबारा संजीवनी मिल सकती है।

गौरतलब है कि प्रदेश में 35 गुरुकुल हैं, जो संस्कृत माध्यम से संस्कृत समेत अन्य विषयों की शिक्षा देते हैं। ये संपूर्णानंद संस्कृत विद्यापीठ वाराणसी और एमडीयू विवि से संबद्ध हैं।

वैसे तो इनकी डिग्रियों को अन्य विवि की डिग्रियों के समकक्ष ही मान्यता है। इसके आधार पर केंद्रीय नौकरियों समेत निजी संस्थानों में आवेदन कर सकते हैं।

एजुकेशन रूल 1998 में आचार्य को एमए के समकक्ष रखा जाता था। लेकिन प्रदेश में 2011-12 में हुड्डा सरकार ने आचार्य की डिग्री लेने वालों को नौकरियां देनी बंद कर दी।

हालांकि इस फैसले का बाबा रामदेव सहित कई संस्कृत विद्वानों ने जोरदार विरोध किया। लेकिन सरकार टस से मस नहीं हुई।

उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने आचार्य की डिग्री समेत जेआरएफ, नेट, सेट, पीएचडी उत्तीर्ण छात्रों को बाहर कर दिया। इस वजह से विद्यार्थियों में गुरुकुल से आचार्य की डिग्री लेने में रुचि नहीं रही।

गिनती के रह गए छात्र

संस्कृत को बढ़ावा नहीं देने के कारण प्रदेश के गुरुकुल और संस्कृत कॉलेज अंतिम सांस ले रहे हैं। कभी जिले में संस्कृत विद्वानों का परिसर रहा गदपुरी के गुरुकुल में अब गिनती के छात्र रह गए हैं।

आचार्य तो दूर अब यहां संस्कृत की मध्यमा डिग्री तक ही पढ़ाई होती है। यहीं हाल बघौला स्थित संस्कृत कॉलेज का है।

आचार्य कक्षा के नाम पर अब यहां सिर्फ 14 छात्र पढ़ाई करते है। जबकि कभी यहां दाखिला के लिए सिफारिशें लगाई जाती थी।

भविष्य में होगा लाभ

जिले में 13 और प्रदेश में 150 के आसपास आचार्य डिग्री धारक हैं। शिक्षा मंत्री की घोषणा का लाभ फिलहाल तो ज्यादा लोगों को मिलने वाला नहीं, लेकिन भविष्य में आचार्य करने वाले लाभान्वित होंगे।

अगामी शैक्षणिक सत्र में सरकारी स्कूलों में गीता को पढ़ाने का निर्णय लिया है। इससे एक तरफ जहां बच्चों को भारत की समृद्ध संस्कृति की जानकारी होगी, वहीं दूसरी तरफ संस्कृत भाषा के विद्वानों को रोजगार के अवसर भी प्रदान होगें। - रामविलास शर्मा, शिक्षा मंत्री हरियाणा सरकार

शिक्षा मंत्री के बयान से आचार्य का ज्ञान अर्जन करने वालों को लाभ होगा। यदि वर्तमान सरकार इस घोषणा को तुरंत लागू करती है तो भविष्य में गुरुकुल से जुड़े विद्यार्थियों को पूरा फायदा मिलेगा। साथ ही प्रदेश के विद्यार्थी संस्कृत के पठन-पाठन के लिए प्रोत्साहित होंगे। -डाॅ. वीके शास्त्री, पूर्व प्राचार्य, तिगांव कॉलेज

जब यूजीसी संस्कृत की प्रथमा डिग्री को मिडिल स्कूल, मध्यमा को हायर सेकेंडरी, शास्त्री को बीए, आचार्य को एमए, शिक्षा शास्त्री को बीएड, विद्या वारिधी को पीएचडी, वाचस्पति को डीलिट की मान्यता देती हैं तो हरियाणा सरकार ऐसा क्यों नहीं करती? -सुरेश शास्त्री, आचार्य डिग्रीधारक

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