गृह मंत्रालय ने केजरीवाल को किया 'बेघर'
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पिछले कई महीनों से चल रही केजरीवाल के घर की तलाश अभी भी पूरी नही हो पाई है। केजरीवाल को उम्मीद थी कि उन्हें नई दिल्ली पालिका परिषद (एनडीएमसी) की ओर से फ्लैट मिल सकता है लेकिन उनकी इस आस को बड़ा झटका लगा है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एनडीएमसी के इलाके के जनप्रतिनिधियों को मकान देने के प्रस्ताव को नकार दिया है।
सूत्रों के अनुसार मंत्रालय ने तर्क दिया कि जनप्रतिनिधियों को मकान देने का एनडीएमसी एक्ट में कोई प्रावधान नहीं है। इस कारण मकान देने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
गृह मंत्रालय को भेजा था प्रस्ताव
दरअसल, दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद अभी भी केजरीवाल सरकारी आवास में ही रह रहे हैं और उन पर जल्द से जल्द घर खाली करने का दबाब भी है।
केजरीवाल ने इस महीने के अंत तक घर खाली करने का वादा भी किया हुआ है। इसके पहले भी केजरीवाल ने कई घर देखे थे लेकिन कहीं बात नहीं बनी। एक कांग्रेसी नेता के घर में रहना तय हुआ लेकिन वह भी विवादों में घिर गया। केजरीवाल को एनडीएमसी से घर मिलने की पूरी उम्मीद थी।
बता दें कि एनडीएमसी ने पिछले दिनों इलाके के जनप्रतिनिधियों को मकान देने के लिए गृह मंत्रालय के पास प्रस्ताव भेजा था। एनडीएमसी इलाके में एक सांसद व दो विधायक जनप्रतिनिधि हैं।
NDMC से खुश नहीं है गृह मंत्रालय
केंद्रीय गृह मंत्रालय, नई दिल्ली पालिका परिषद (एनडीएमसी) के कामकाज से असंतुष्ट है। गृह मंत्रालय की टीम ने बीते रविवार को परिषद मुख्यालय का दौरा किया।
इस दौरान टीम ने एनडीएमसी की कई खामियां सामने आईं। इसके साथ ही परिषद को भंग करने और इसके अध्यक्ष के तबादले के कयास का सिलसिला शुरू हो गया है।
सूत्रों के अनुसार पिछले रविवार को एनडीएमसी मुख्यालय पहुंची मंत्रालय की टीम ने बिजली आपूर्ति के तौर पर प्रतिवर्ष हो रहे करीब दो सौ करोड़ रुपये के घाटे पर कड़ी नाराजगी जताई।
हो सकता है बड़ा फेरबदल
इसके अलावा टीम ने अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने की प्रक्रिया को भी गलत ठहराया। साथ ही परिषद के इलाके में तहबाजारी की संख्या बढ़ाने पर असंतोष जताया।
बताते चलें कि रविवार होने के बावजूद इस दिन परिषद की बैठक बुलाई गई थी। सूत्रों की मानें तो परिषद को भंग करने की तैयारी कर ली गई है।
फिलहाल परिषद का कार्यकाल का खत्म होने में डेढ़ वर्ष समय शेष है। परिषद में इलाके के सांसद व विधायक और कई सरकारी अधिकारी भी सदस्य होते है।