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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Home construction in Delhi becomes cheaper, with up to 70% relief on water and sewer charges

Delhi NCR News: दिल्ली में घर बनाना हुआ सस्ता, पानी-सीवर चार्ज में 70% तक राहत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 22 May 2026 08:29 PM IST
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नाप-जोख का चक्कर खत्म, घर के साइज के बजाय पानी की असली मांग के आधार पर तय होगा चार्ज
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
राजधानी में अपना घर बनाने या पुराने मकानों में नया निर्माण कराने की योजना बना रहे लोगों के लिए रेखा गुप्ता सरकार ने बड़ी राहत का एलान किया है। सरकार ने पानी और सीवर के इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज (आईएफसी) में करीब 70 प्रतिशत तक की कटौती कर दी है। इससे मध्यवर्गीय परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी कम होगा। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ये शुल्क घर के क्षेत्रफल के बजाय वास्तविक पानी की मांग के आधार पर तय किए जाएंगे।
दिल्ली सचिवालय में शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और जनहितकारी बनाना है। जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि पुरानी व्यवस्था भ्रष्टाचार और मनमानी का माध्यम बन चुकी थी। पहले अधिकारी बालकनी, सीढ़ी और कुल निर्मित क्षेत्र (बिल्टअप एरिया) के आधार पर भारी शुल्क निर्धारित किए जाते थे, जिससे लोगों पर 15 से 20 लाख रुपये तक का बोझ पड़ता था। अब सरकारी दस्तावेजों में दर्ज जानकारी को ही अंतिम माना जाएगा और अधिकारियों की मनमानी नाप-जोख की व्यवस्था खत्म होगी।
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पहले 15-16 लाख रुपये तक देना होता था शुल्क, अब 2 से 3 लाख रुपये में होगा काम
जल मंत्री ने बताया कि जिन मामलों में पहले लोगों को 15-16 लाख रुपये तक शुल्क देना पड़ता था, अब वही कार्य महज 2 से 3 लाख रुपये में हो सकेगा। सरकार ने 200 वर्ग मीटर तक के प्लॉटों को पहले की तरह सभी चार्ज से पूरी तरह मुक्त रखा है। इससे छोटे मकान मालिकों और बड़ी आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। जल मंत्री ने कहा कि ये वादा उनके चुनावी घोषणा पत्र में था। सरकार ईमानदार शासन और कम भ्रष्टाचार के अपने वादे को पूरा करने के लिए काम कर रही है।
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कॉलोनियों को श्रेणीवार बड़ी छूट
मुख्यमंत्री ने कहा, नई नीति के तहत विभिन्न श्रेणी की कॉलोनियों के लिए विशेष रियायतें दी गई हैं। ई और एफ श्रेणी की कॉलोनियों की संपत्तियों को इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज में 50 प्रतिशत की सीधी छूट मिलेगी। वहीं जी और एच श्रेणी की कॉलोनियों के निवासियों को 70 प्रतिशत तक राहत दी जाएगी।
-मध्य वर्ग को अतिरिक्त राहत देते हुए सरकार ने घोषणा की कि यदि 200 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर 50 वर्ग मीटर या उससे छोटे रिहायशी यूनिट (फ्लैट) बनाए जाते हैं तो उन्हें 50 प्रतिशत अतिरिक्त छूट दी जाएगी। इससे छोटे परिवारों और किफायती आवास को बढ़ावा मिलेगा।
- सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं और आयकर अधिनियम की धारा 12एबी के तहत पंजीकृत चैरिटेबल ट्रस्टों को भी पानी और सीवर शुल्क में 50 प्रतिशत अतिरिक्त छूट दी जाएगी।

पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा
सरकार ने नई नीति को पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो संस्थान और व्यावसायिक भवन जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम अपनाएंगे उन्हें सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इसका उद्देश्य जल संरक्षण और पानी को रीसाइकिल करने को प्रोत्साहन देना है। हालांकि यह छूट केवल उन्हीं संस्थानों को मिलेगी जिनके सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) पूरी तरह संचालित होंगे और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों पर खरे उतरेंगे। निरीक्षण के दौरान यदि एसटीपी बंद पाया गया तो छूट वापस ली जाएगी और संबंधित राशि पर 0.05 प्रतिशत प्रतिदिन की दर से जुर्माना लगाया जाएगा।

किसे देना होगा शुल्क, किसे मिलेगी राहत
नई व्यवस्था के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज केवल नए निर्माण या पुराने भवनों में अतिरिक्त निर्माण पर लागू होंगे। यदि कोई व्यक्ति अपने पुराने घर का पुनर्निर्माण करता है और पानी की मांग नहीं बढ़ती है तो उसे कोई नया शुल्क नहीं देना होगा। साथ ही खुले क्षेत्र और एफएआर से बाहर के हिस्सों को शुल्क निर्धारण में शामिल नहीं किया जाएगा।



जानिए, ए से एच तक 8 श्रेणी की कॉलोनियों के बारे में
-दिल्ली राजस्व विभाग और दिल्ली नगर निगम ने सर्कल रेट और प्रॉपर्टी टैक्स तय करने के लिए कॉलोनी की श्रेणी निश्चित की है

-कॉलोनियों का वर्गीकरण मुख्य रूप से उस क्षेत्र के भौतिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे पर निर्भर करता है।
-पॉश इलाके लुटियंस जोन, ग्रेटर कैलाश ए श्रेणी में आते हैं जबकि कम विकसित या दूरदराज के इलाके एच श्रेणी में रखे जाते हैं।

-ए से डी श्रेणी तक के इलाकों में पानी की आपूर्ति, सीवरेज, चौड़ी सड़कें और पार्क जैसी सुविधाएं बेहतर हैं।
-ए से डी श्रेणी तक के इलाकों में जमीन का सरकारी रेट (सर्किल रेट) सबसे ज्यादा है, वहीं एच श्रेणी में सबसे कम है।

-दिल्ली की अधिकांश अनधिकृत कॉलोनियां आमतौर पर एफ, जी या एच श्रेणी में आती हैं। इन्हें सरकार अब नियमित कर रही है।

वैश्विक मॉडल बनाने की दिशा में अहम कदम
इस नीति का उद्देश्य लोगों पर वित्तीय बोझ बढ़ाना नहीं, बल्कि बेहतर सुविधाएं और पारदर्शी प्रशासन देना है। यह कदम दिल्ली को जल प्रबंधन और सीवेज व्यवस्था के क्षेत्र में वैश्विक मॉडल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
रेखा गुप्ता, मुख्यमंत्री
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