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फूल और गुलाल के साथ ही खेली लठमार होली
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Sat, 07 Mar 2015 09:02 AM IST
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फरीदाबाद में यह शहर ब्रज के 84 कोस में नहीं आता, फिर भी यहां आज ब्रज की होली की छाप देखने को मिलेगी। शहर में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां रहने वाले सैकड़ों ब्रजवासियों ने आज भी अपनी पारंपरिक बरसाने की होली को कायम रखा है। यहां लोग लठमार, फूल और गुलाल की होली उसी अंदाज में खेलते हैं, जैसे बरसाने में खेली जाती है। इसको देखने के लिए भी आसपास के हजारों लोगों का तांता लग जाता है। महिलाएं करीब एक हफ्ते पहले से इसकी तैयारियां शुरू कर देती हैं।
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हम बात कर रहे हैं न्यू तिलपत कॉलोनी की, जहां मथुरा, अलीगढ़, पलवल, आगरा, गोवर्धन आदि ब्रज क्षेत्र के 60 फीसदी लोग बरसान के रसिया और लठ के साथ शुक्रवार को होली खेलेंगे। बृहस्पतिवार को पूजन के बाद महिलाएं डंडों पर तेल लगाने में जुट गईं। न्यू तिलपत आरडब्ल्यूए के प्रधान श्याम बाबू शर्मा ने बताया कि बहुत से लोग होली के त्योहार को पसंद नहीं करते क्योंकि उनका मानना है कि होली में मारपीट होती है। कीचड़ और रंगों से चेहरे को बिगाड़ा जाता है, लेकिन सच यह है कि होली के दिन सब लोग एक हो जाते हैं और एक साथ होली खेलते हैं।
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क्या कहते हैं लोग
यहां रहते हुए 25 साल हो गए। बच्चों की पढ़ाई और नौकरी के बीच मथुरा जाने का समय नहीं निकाल पाता, लेकिन जब मथुरा के आसपास के लोग जब इकठ्ठा होकर होली खेलते हैं, तो भूल जाते हैं कि हम बरसाने में हैं या फरीदाबाद में।
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-गुड्डी, गोवर्धन
न्यू तिलपत की होली बिल्कुल बरसाने की तरह मनाई जाती है। ब्रज के रसिये के साथ नाच-गाना, लठमार होली, हवा में गुलाल सब मिलकर खेलते हैं। ब्रजवासियों के साथ जब गढ़वाल, बंगाल, हिमाचल के लोग मिल जाते हैं, तो होली का आनंद दोगुना हो जाता है।
-गजेंद्र प्रसाद, सौंख
इस बार ससुराल में पहली होली है। अपने देवर के साथ खेलने को उत्साहित हूं। लठमार होली के लिए डंडे से लेकर गुलाल तैयार कर लिया है। पेन ड्राइव में होली के गाने रिकॉर्ड कर लिए गए हैं। होली पर धमाल मचेगा।
-अनीता
दीपावली से ज्यादा अच्छा होली का त्योहार लगता है। यहां बहुत ही अच्छे ढंग से होली खेली जाती है। सुबह चंदन के टीके के साथ होली की बधाई और बाद में लठ से पुरुषों की पिटाई करने में आनंद आता है।
-जमुना देवी