‘ड्रिब्लिंग के बादशाह’ के रुप में याद किए जांएगे शाहिद, बनारस में होंगे सुपर्द-ए-खाक
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80 के दशक के हॉकी सुपरस्टार और ‘ड्रिब्लिंग के बादशाह’ कहे जाने वाले मो. शाहिद का बुधवार को गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में देहांत हो गया। सुबह 10.41 मिनट पर उन्होंने आखिरी सांस ली।
बृहस्पतिवार को उनके पैतृक शहर वाराणसी में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। 56 वर्षीय मोहम्मद शाहिद लीवर की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे। 4 अप्रैल 1960 को वाराणसी में जन्मे मो. शाहिद करीब छह महीने से बीमार चल रहे थे।
28 जून को तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें वाराणसी स्थित बीएचयू (बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी) के सर सुंदरलाल अस्पताल से मेदांता अस्पताल रेफर किया गया।
शाहिद बेहतरीन ड्रिब्लर के रुप में याद किए जाएंगे
29 जून को वह एयर एंबुलेंस से गुड़गांव के मेदांता अस्पताल पहुंचे थे। 15 जुलाई को उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अवधेश कुमार दूबे ने बताया कि शाहिद को क्रॉनिक लीवर समस्या, किडनी फेल होने के साथ इंफेक्शन भी था।
बुधवार सुबह 10.41 बजे में अंतिम सांस ली। अंतिम मौके पर उनकी पत्नी परवीन, बेटी हिना और बेटा सैफ के अलावा भतीजे और भाई मौजूद थे।
देश की ओर से हॉकी खेलने वालों में शाहिद बेहतरीन ड्रिब्लर के रूप में याद किए जाते हैं, और वर्ष 1980 के मॉस्को ओलंपिक में भारतीय टीम के स्वर्ण पदक जीतने में उनकी अहम भूमिका रही थी।
पद्मश्री से नवाजा गया था उन्हें
उसके बाद भारतीय टीम कभी ओलंपिक में स्वर्ण पदक नहीं जीत पाई है। रेलवे में स्पोर्ट्स ऑफिसर के पद पर कार्यरत मोहम्मद शाहिद को वर्ष 1986 में देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा गया था।
ल के दौरान गेंद पर अपने बेजोड़ नियंत्रण के लिए मशहूर शाहिद को जफर इकबाल के साथ उनकी शानदार जोड़ी के लिए भी याद किया जाता है, जिन्होंने भारतीय टीम को वर्ष 1982 और 1986 में एशियाई खेलों में भी पदक दिलाए थे।