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जो एचआईवी पॉजिटिव होने पर जिंदगी खत्म मान लेते हैं उन्हें लेना चाहिए इनसे सबक

Thu, 01 Dec 2016 01:41 PM IST
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुरुग्राम
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Thu, 01 Dec 2016 01:41 PM IST
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hiv positive people learn lessons from these women

एचआईवी पॉजिटिव होने का मतलब जिंदगी खत्म मान लिया जाता है। साइबर सिटी में कुछ लोग एचआईवी से पीड़ित हैं, लेकिन उनकी जिंदगी  ‘पॉजिटिव’  है। उनका जीने का हौसला दूसरे एचआईवी पीड़ित के लिए एक मिसाल है।

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स्वास्थ्य विभाग और एड्स पर काम करने वाली संस्थाएं उनकी मिसाल देती हैं। एचआईवी पीड़ित का तमगा देकर समाज भले ही उन्हें अकेला छोड़ देता हो, लेकिन उनका हमसफर जिंदगी के सफर में पॉजिटिव ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है। ऐसी ही कहानी है गुडग़ांव के अलग-अलग इलाके के तीन लोगों की...

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दोनों पॉजिटिव, लेकिन हैं खुश

hiv positive people learn lessons from these women
केस-1: फिर भी पति है साथ
गुरुग्राम की एक कॉलोनी में रहने वाले एक परिवार में पति को एड्स हुआ। कुछ दिन बाद उसकी मृत्यु हो गई। बाद में महिला ने दूसरी शादी कर ली। महिला ने अपने दूसरे पति को सब कुछ बताया, इसके बावजूद उन्होंने शादी की। पति अब भी सुरक्षित है। अब महिला की बेटी है, लेकिन वो भी सिजेरियन डिलीवरी के कारण नेगेटिव है। महिला कहती है कि बीमारी की वजह को लेकर मेरे पति ने कभी शंका प्रकट नहीं की। मुझे पति के प्यार ने जीने का सहारा दिया। कम पढ़े़-लिखे होने के बावजूद उनकी समझदारी ने मुझे हमेशा हौसला दिया है। 

केस-2: दोनों पॉजिटिव, लेकिन हैं खुश
गुरुग्राम के पॉश इलाके में रहने वाले दंपति एचआईवी पॉजिटिव हैं, लेकिन दोनों खुश हैं। लगातार बीमार रहने के बाद मेडिकल चेकअप कराया, तब एड्स की पुष्टि हुई। महिला को समझ नहीं आ रहा था, यह बीमारी कहां से आई। काउंसलिंग के दौरान पता चला कि विदेश में गलत संगत के बाद यह बीमारी हो सकती है। इसके बाद से वे दोनों अब साथ हैं। अब वो दोनों लोगों को इस बीमारी से बचने के तरीके और जीने का हौसला देते हैं।

केस-3: गलती से हो गई पॉजिटिव
एक 20 साल की लड़की एचआईवी पॉजिटिव है। उसको मलाल है कि किसी एक व्यक्ति की गलती से वह आज इस बीमारी से जूझ रही है। मगर अब वह इस जिंदगी के साथ ही खुद को आगे बढ़ा रही है। बीकॉम किया और एक प्राइवेट कंपनी में बतौर कॉल अटेंडेंट काम कर रही है। काउंसलिंग के दौरान पता चला कि जब वह दस साल की थी, तब हेपेटाइटिस-बी हुआ था। इस दौरान खून चढ़ाया गया। उसके बाद से वह बीमार रहने लगी। करीब पांच साल की बीमारी के बाद जांच में इसकी पुष्टि हुई। शुरूआत में परिवार वालों पर पहाड़ टूटा, लेकिन सभी ने मिलकर इस लड़की को हौसला दिया और अब वो पॉजिटिव जिंदगी जी रही है।
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