{"_id":"440772e96ef18c70a8b2774e66248013","slug":"hitech-system-to-prevent-air-pollution","type":"story","status":"publish","title_hn":"वायु प्रदूषण रोकने को हाईटेक सिस्टम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वायु प्रदूषण रोकने को हाईटेक सिस्टम
डीपी आर्य/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Tue, 18 Mar 2014 10:25 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अब आटोमैटिक एयर क्वालिटी मानीटरिंग सिस्टम से वायु प्रदूषण को नियंत्रित किया जाएगा। शहर के व्यस्ततम ट्रैफिक क्षेत्रों और इंडस्ट्रियल एरिया से सटी बस्तियों को इसके लिए चुना गया है।
ताकि समय रहते लोगों की सेहत को सुरक्षित रखने के कदम उठाए जा सकें। लखनऊ और कानपुर में यह सिस्टम पहले ही काम कर रहा है।
गाजियाबाद विश्व के बड़े प्रदूषित शहरों में गिना जाता है। यहां ही हवा और पानी सेहत के लिए खतरनाक हैं। पॉल्यूशन की सटीक जानकारी करने वाला सिस्टम बेहद पुराना हो चुका है।
10 मार्च को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, परिवहन निगम, प्रशासन, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त बैठक हुई थी। इसमें प्रदूषण मानीटरिंग, कंट्रोलिंग और इससे होने वाली बीमारियों की रोकथाम की योजना बनी।
विज्ञापन
हैवी ट्रैफिक और इंडस्ट्रियल एरिया से सटे आबादी क्षेत्रों में आटोमैटिक एयर क्वालिटी मानीटरिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। दस स्थानों पर इन्हें लगाने की योजना है, जिसमें फिलहाल दो लगेंगे।
स्थान का चयन आरटीओ, सीएमओ, प्रशासन और नगर निगम करेगा। अभी तक महानगर में दो मैनुअल सिस्टम ही उपलब्ध हैं। वे भी दशकों पुराने हैं।
एक सिस्टम पर करीब 30 लाख रुपये का खर्च आएगा। इनके द्वारा पॉल्यूशन की मानीटरिंग जनपद के साथ ही लखनऊ-दिल्ली के कंट्रोल बोर्ड से आनलाइन होगी।
विज्ञापन
ताकि समय रहते लोगों की सेहत को सुरक्षित रखने के कदम उठाए जा सकें। लखनऊ और कानपुर में यह सिस्टम पहले ही काम कर रहा है।
गाजियाबाद विश्व के बड़े प्रदूषित शहरों में गिना जाता है। यहां ही हवा और पानी सेहत के लिए खतरनाक हैं। पॉल्यूशन की सटीक जानकारी करने वाला सिस्टम बेहद पुराना हो चुका है।
विज्ञापन
10 मार्च को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, परिवहन निगम, प्रशासन, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त बैठक हुई थी। इसमें प्रदूषण मानीटरिंग, कंट्रोलिंग और इससे होने वाली बीमारियों की रोकथाम की योजना बनी।
विज्ञापन
हैवी ट्रैफिक और इंडस्ट्रियल एरिया से सटे आबादी क्षेत्रों में आटोमैटिक एयर क्वालिटी मानीटरिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। दस स्थानों पर इन्हें लगाने की योजना है, जिसमें फिलहाल दो लगेंगे।
स्थान का चयन आरटीओ, सीएमओ, प्रशासन और नगर निगम करेगा। अभी तक महानगर में दो मैनुअल सिस्टम ही उपलब्ध हैं। वे भी दशकों पुराने हैं।
एक सिस्टम पर करीब 30 लाख रुपये का खर्च आएगा। इनके द्वारा पॉल्यूशन की मानीटरिंग जनपद के साथ ही लखनऊ-दिल्ली के कंट्रोल बोर्ड से आनलाइन होगी।