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महिला आरक्षण के विरोधियों को इतिहास माफ नहीं करेगा : सिरसा
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
विधानसभा के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के दौरान मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक देश की आधी आबादी को उनका संवैधानिक अधिकार दिलाने की ऐतिहासिक पहल थी, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे बाधित कर महिलाओं के हितों के साथ अन्याय किया।
सिरसा ने कहा कि लोकसभा, विधानसभा, राज्यसभा और विधान परिषदों में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की दिशा में यह निर्णायक कदम था। उनके अनुसार, यदि यह विधेयक पूरी तरह लागू होता तो देश की नीति निर्माण प्रक्रिया अधिक समावेशी और मजबूत बनती।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण के जरिए लाखों महिलाएं निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनी हैं, जो दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक महिला सहभागिता मॉडल का उदाहरण है।
डिलिमिटेशन के मुद्दे पर विपक्ष की ओर से फैलाए गए भ्रम को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि यह संवैधानिक आवश्यकता है, न कि राजनीतिक विकल्प। जनसंख्या वृद्धि के अनुरूप समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत है।
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नई दिल्ली।
विधानसभा के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के दौरान मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक देश की आधी आबादी को उनका संवैधानिक अधिकार दिलाने की ऐतिहासिक पहल थी, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे बाधित कर महिलाओं के हितों के साथ अन्याय किया।
सिरसा ने कहा कि लोकसभा, विधानसभा, राज्यसभा और विधान परिषदों में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की दिशा में यह निर्णायक कदम था। उनके अनुसार, यदि यह विधेयक पूरी तरह लागू होता तो देश की नीति निर्माण प्रक्रिया अधिक समावेशी और मजबूत बनती।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण के जरिए लाखों महिलाएं निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनी हैं, जो दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक महिला सहभागिता मॉडल का उदाहरण है।
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डिलिमिटेशन के मुद्दे पर विपक्ष की ओर से फैलाए गए भ्रम को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि यह संवैधानिक आवश्यकता है, न कि राजनीतिक विकल्प। जनसंख्या वृद्धि के अनुरूप समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत है।
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