World Heritage Day: पहली महिला शासक रजिया सुल्तान का मकबरा बना खंडहर, अस्तित्व को बचाने की लड़ाई में कई इमारत
मध्यकालीन भारत की प्रथम महिला शासक रजिया सुल्तान का मकबरा संरक्षण की उदासीनता की मार झेल रहा है। इसी तरह का हाल लोदी गार्डन में स्थित सिकंदर लोदी के मकबरे का है। इतना ही नहीं, मुगलों का आखिरी जफर महल भी देखरेख के अभाव में खंडहर बन रहा है।
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राजधानी में ऐतिहासिक इमारतें अपने अंदर इतिहास समेटे हुए हैं, लेकिन कई इमारतें समय के साथ नेस्तनाबूत हो गई हैं। वहीं, जो कुछ इमारतें बची हैं, वह संरक्षण के अभाव में अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रही हैं।
इन इमारतों में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से संरक्षित मध्यकालीन भारत की प्रथम महिला शासक रजिया सुल्तान का मकबरा संरक्षण की उदासीनता की मार झेल रहा है। इसी तरह का हाल लोदी गार्डन में स्थित सिकंदर लोदी के मकबरे का है। इतना ही नहीं, मुगलों का आखिरी जफर महल भी देखरेख के अभाव में खंडहर बन रहा है। अगर सरकार व प्रशासन का इन ऐतिहासिक इमारतों को लेकर असंवेदनशील रवैया यूं ही बरकरार रहा, तो आने वाली पीढि़यों के लिए इन इमारतों का इतिहास केवल किताबों में ही सीमित होकर रह जाएगा।
इतिहास में दर्ज दिल्ली सात बार उजड़ी, फिर भी डटी रही। इस विरासत के सफर के साथी कभी पांडव, राजपूतों से लेकर खिलजी, तुगलक, सैयद, लोदी और मुगल आदि बने, लेकिन अब इनकी इमारतें देखरेख के अभाव में खंडहर बन रही हैं। मुस्लिम व तुर्की के इतिहास में पहली महिला शासक रजिया सुल्तान का मकबरा पुरानी दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके की भोजला पहाड़ी के बुलबुली खाना में स्थित है। इसकी दीवारों से जगह-जगह से पत्थर निकल रहे हैं।
वहीं, गली में बहता पानी भी इसकी नींव कमजोर कर रहा है। देश-विदेश से यहां सैलानी संकरी गलियों से होते हुए इस मकबरे के दीदार के लिए पहुंचते हैं। रजिया सुल्तान शमशुद्दीन इल्तुतमिश की बेटी थी, जिन्होंने 1236 से 1240 तक दिल्ली की सल्तनत पर राज किया था। सन 1240 में ही हरियाणा के कैथल में बहराम शाह से युद्ध करते हुए रजिया सुल्तान का निधन हो गया था।
इन ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण को लेकर तैयारियां चल रही हैं। कुछ में संरक्षण कार्य शुरू होने वाला है। इनका जल्द संरक्षण कार्य किया जाएगा। -प्रवीण सिंह, दिल्ली सर्कल चीफ व सुपरिटेंडेंट आर्कियोलॉजिस्ट, एएसआई
इसी तरह लोदी गार्डन में स्थित सिकंदर लोदी का मकबरा, बड़ा गुंबद, शीश गुंबद के रखरखाव का अभाव है। इसकी टूटती दीवारें, महराब और कमजोर होती नींव बदहाली की कहानी कह रहे हैं। सैय्यद राजवंश के अंतिम शासक अला-उद-दीन आलम शाह द्वारा अपने पिता मोहम्मद शाह की कब्र यहां पर 1444 ई में बनाई गई थी। इसमें लोदी राजवंश से सिकंदर लोदी का मकबरा है, जिसे 1517 में उनके बेटे इब्राहिम लोदी ने बनाया था। इसी में बड़ी गुंबद है और पास में स्थित तीन गुंबदों वाली मस्जिद के द्वार के रूप में कार्य करती है। गुंबद और मस्जिद दोनों को इस जगह के तत्कालीन शासक सिकंदर लोदी द्वारा सन 1494 ईस्वी में बनवाया गया था।
मुगल शासकों द्वारा बनाई अंतिम धरोहर भी हो रही खंडहर
दक्षिणी दिल्ली में स्थित मुगल शासक बहादुर शाह जफर का ग्रीष्मकालीन जफर महल बदहाल है। इसकी संगमरमर के फूल की आकृतियां और महल पर बनीं विभिन्न नक्काशियां भी वक्त के साथ जर्जर होती जा रही हैं। यह मुगल शासकों की ओर से बनवाई गई अंतिम धरोहर है। इस महल का निर्माण सन 1820 में शाहजहां चतुर्थ के पोते अकबर शाह द्वितीय ने करवाया था, लेकिन इसका 1847-1857 के बीच जीर्णोद्धार बहादुर शाह जफर ने कराया था। साथ ही आखिरी मुगल बादशाह ने महल के बाहरी भाग में एक आलीशान दरवाजे का भी निर्माण करते हुए इसका भव्य विस्तार कराया था। यहां इतिहास में रुचि रखने वाले लोग व शोधार्थी घूमने आते हैं। यह लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से बना है। लगभग 50 फीट ऊंचा और 11 फीट 9 इंच चौड़ा द्वार है। यह तीन मंजिला है, जिसमें बंगाल के गुंबदों से ढंकी व उभरी हुई खिड़कियां हैं।