दिल्ली: खत्म हुई मजहब की दीवार, तीन महीने बाद साथ बैठे हिंदू-मुस्लिम छात्र
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भाजपा शासित उत्तरी नगर निगम क्षेत्र में स्थित स्कूल में धार्मिक आधार पर भेद के मसले में कार्रवाई के बाद स्कूल के सभी 17 सेक्शन पुरानी व्यवस्था के मुताबिक काम करने लगे हैं। पिछले तीन महीने से वजीराबाद गांव के प्राथमिक स्कूल में बहाल व्यवस्था के तहत दोनों संप्रदायों के छात्रों को अलग-अलग सेक्शन में बिठाया जा रहा था। लेकिन इस मामले में हुए चौतरफा विरोध के बाद गुरुवार से पुरानी व्यवस्था बहाल कर दी गई। अब सभी 8 सेक्शन में दोनों धर्मों के बच्चे एक साथ बैठने लगे हैं।
दूसरी ओर, स्कूल में धर्म के आधार पर किए गए बंटवारे की वजह अब तक पूरी तरह साफ नहीं हो सकी है। सूत्रों के मुताबिक दोनों धर्म के बच्चों के खानपान की आदत और कुछ व्यंजनों से परहेज के कारण उन्हें अलग अलग कक्षाओं में बिठाया जा रहा था।
भाजपा शासित उत्तरी निगम क्षेत्र में स्थित स्कूल में धर्म के आधार पर बांटने को दूसरे दलों ने साजिश करार देते हुए भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाए हैं कि संगठन विशेष के इशारे पर ऐसा किया गया। प्रिंसिपल इंचार्ज पर कार्रवाई करते हुए इस मामले को दबाने की कोशिश की गई, ताकि साजिश में शामिल लोगों तक बात न पहुंचे।
एमसीडी स्कूल के बाहर अभिभावकों ने जताया रोष
अभिभावकों ने गुरुवार को वजीराबाद गांव स्थित प्राइमरी स्कूल के बाहर प्रदर्शन कर सरकार और एमसीडी के खिलाफ विरोध जताया। हाथों में पोस्टर लेकर उन्होंने निगम अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अभिभावकों ने इस मामले से जुड़े तमाम लोगों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि स्कूल के प्रिंसिपल ही ऐसे आदेश देंगे तो निगम के स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने क्यों भेजें।
केवाईसी ने सिविल लाइन में जताया विरोध
सिविल लाइन जोन स्थित उत्तरी निगम कार्यालय के बाहर भी छात्र संगठन क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईसी) ने भी विरोध दर्ज कराया। युवाओं ने निगम कमिश्नर को हटाने की मांग करते हुए सौहार्द बिगाड़ने के लिए जिम्मेवार तमाम अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
धर्म के आधार पर शिक्षा को बांटना निंदनीय : विजेंद्र
विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने उत्तरी नगर निगम के वजीराबाद स्थित निगम प्राथमिक विद्यालय में कक्षा को धर्म के आधार पर बांटने की कड़ी निंदा की। उन्होंने इस मुद्दे पर तुरंत कार्रवाई करने पर निगम की पहल को सराहनीय कदम बताया है। इतना ही नहीं उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस राजनीतिक रोटियां सेक कर धार्मिक सोहार्द को बिगाड़ रहे हैं।
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि स्कूल प्रधानाचार्य के खिलाफ तुरंत कार्रवाई से स्पष्ट है कि भाजपा धर्म के आधार पर शिक्षा के क्षेत्र में इस प्रकार की कार्यवाही को सहन नहीं करती। यह खेद का विषय है कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस इस मुद्दे की संवेदनशीलता को न समझते हुए सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने के लिए राजनीतिकरण कर रहे हैं। वे जानबूझकर धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने का काम कर रहे हैं।
स्कूल प्रकरण पर स्थायी समिति की बैठक में हंगामा
एमसीडी के वजीराबाद स्थित स्कूल में धर्म के आधार पर छात्रों को अलग-अलग सेक्शन में बांटे जाने के मामले पर उत्तरी नगर निगम की स्थायी समिति की बैठक में हंगामा हुआ। कांग्रेस व आप के पार्षदों ने प्रिंसिपल इंचार्ज को निलंबित किए जाने को नाकाफी बताया। साथ ही मामले में इंस्पेक्टर सहित शिक्षा विभाग के अन्य संबंधित अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की मांग की। वहीं सत्ता पक्ष ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली। दूसरी ओर, स्कूल के सभी सेक्शन के लिए पुरानी व्यवस्था बहाल कर दी गई है।
स्थायी समिति की बैठक के दौरान सदस्य विकास गोयल और मुकेश गोयल ने निगम अधिकारियों और भाजपा पर जमकर निशाना साधा। एक सदस्य ने तो दल विशेष के इशारे पर बच्चों में नफरत फैलाने का भी आरोप लगाया। इस बात को लेकर सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई, लेकिन बाद में मामला शांत हो गया। स्थायी समिति की अध्यक्षा वीणा विरमानी ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि किसी भी स्कूल में ऐसा होना बेहद गलत है। इस गलती के लिए दोषी प्रिंसिपल को सजा भी दी गई। वहीं निगम के सदस्यों ने इस कार्रवाई को नाकाफी बताया।
देशद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग
एक सदस्य ने इस मामले के दोषियों के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज कराने की भी मांग की। हालांकि विपक्ष के सदस्यों की कम संख्या होने की वजह से उनकी बातों को खास तवज्जो नहीं दी गई। समिति अध्यक्षा ने कहा कि इस मामले की जांच चल रही है और अगर और भी कोई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
दो इंस्पेक्टर के हवाले उत्तरी निगम के स्कूली बच्चे
एमसीडी स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशक ने माना कि इंस्पेक्टर की संख्या कम है। बावजूद स्कूलों में नियमित निरीक्षण किया जाता हैं। हालांकि, सदस्यों ने जब सवाल दागा कि आखिरकार दो निरीक्षक और प्रिंसिपल के जिम्मे ही उत्तरी दिल्ली के स्कूलों में पढ़ने वालों का भविष्य टिका है तो आला अधिकारियों की क्या जरूरत है। इस मसले पर किसी के पास कोई जवाब नहीं था, लेकिन सदस्यों ने इस मामले को लेकर पुरजोर विरोध दर्ज कराया।