जुनैद की हत्या से खंडावली की ईद हुई फिकी, अब बघौला की दीवाली में नहीं होगी रोशनी
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जुनैद हत्याकांड को लेकर सियासत गर्म है। आए दिन कोई न कोई राजनेता गांव पहुंचकर घटना को सांप्रदायिक रूप देने की कोशिश करता है। वहीं, दूसरी तरफ सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देने की प्रयास भी चल रहे है। बुधवार को खंदावली से करीब दस किलोमीटर दूर बसे बघौला के ब्राह्मण व अन्य हिंदू परिवार जुनैद की हत्या पर शोक व्यक्त करने पहुंचे। लोगों ने कहा कि जुनैद के जाने पर खंदावली में ईद फीकी रही तो बघौला में दिवाली भी ठीक से नहीं मनेगी।
हिंदू और मुसलमानों का रक्त संबंध
हमलावरों नें ऐसी चोट की है कि जिससे हिंदू और मुसलमानों के रक्त संबंध का ताना-बाना तड़प उठा है। मास्टर चंदर ने बताया खंदावली गांव के मुस्लिम परिवारों का निकास बघौला से है। बघौला और खंदावली दोनों का वशिष्ठ गोत्र है। बघौला में वशिष्ठ गोत्र के ब्राह्मण रहते हैं।
बताया जाता है कि यहां के कुछ लोगों ने मुगल बादशाह औरंगजेब के समय में इस्लाम धर्म अपना लिया था। बावजूद इसके दोनों गांवों में अभी भी सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। खंदावली और बघौला के हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच आज भी शादी-विवाह के मौके पर निमंत्रण और भोज की रवायत कायम है। एक पात में खाते-पीते हैं। कोई भेदभाव नहीं।
दोनों समुदायों में सराय बाबा आदरणीय
पंडित घनश्याम ने कहा कि साल में एक बार लगने वाले सराय बाबा के मेले पर दोनों समुदायों के लोग इकठ्ठे होते हैं। अपने-अपने ढंग से मेले में सराय बाबा के अपनी भावनाएं प्रस्तुत करते हैं। खंदावली और बघौला के लोग बराबरी से सराय बाबा के पास आकर पारिवारक मुशकिलों निजात पाने के लिए मन्नतें मांगते हैं।
दोषियों को मिले सजा
बघौला के तुलाराम, तेजी ठोंडा, हुकुम, गोविंद राम, रमेश, मांगे, प्रकाश ने बताया कि गांव के लोगों ने पीड़ित परिवार को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया है। आरोपियों के साथ कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।