{"_id":"b800ffe4e76e9ce3a268f68b232df06a","slug":"hinden-river-being-put-in-the-poison-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हिंडन नदी में डाला जा रहा ‘जहर’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिंडन नदी में डाला जा रहा ‘जहर’
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Mon, 04 May 2015 01:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का ढुलमुल रवैया हिंडन पर भारी पड़ रहा है। हिंडन को सिर्फ कागजों में ही प्रदूषण मुक्त किया जा रहा है।
विज्ञापन
आलम यह है कि हिंडन में जहरीला पानी डालने वाली फैक्ट्रियों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। जब कि हकीकत में न तो हिंडन में ‘जहर ’डालने का सिलसिला रुका है और न ही फै क्ट्रियों में लगे ईटीपी (एफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट) शुरू हुए हैं।
विज्ञापन
हालांकि आंकड़ों की बाजीगरी में माहिर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का दावा है कि हिंडन को प्रदूषित करने से रोकने के सभी इंतजाम किए जा रहे हैं।
हिंडन नदी का प्रदूषण खतरनाक स्तर ई श्रेणी पर पहुंच गया है। साफ है अब हिंडन का पानी उपयोग लायक नहीं रह गया है। हिंडन के मीठे पानी को जहरीला बनाने में फैक्ट्रियों ने अहम भूमिका निभाई है।
विज्ञापन
हिंडन में करहेड़ा की 30, मेरठ रोड औद्योगिक क्षेत्र की 27 और अर्थला की 11 फैक्ट्रियों से निकलने वाला ‘जहर ’हिंडन में डाला जाता है। पूजन सामग्री के अलावा हिंडन के किनारों पर कूड़ा भी डाला जा रहा है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रशासन बार-बार नोटिस भेजकर फैक्ट्रियों को ईटीपी से पानी को शुद्ध कर हिंडन में डालने की चेतावनी देता है। कूड़ा रोकने का भी दावा किया जाता है।
मगर नोटिस भेजने के बाद अफसर फै क्ट्रियों और कूड़ा फेंकने वालों पर कार्रवाई करने की नहीं सोचते। साइट-4 और लोनी रोड औद्योगिक क्षेत्र मोहननगर में कपड़ा डाइंग फैक्ट्रियों की भरमार है।
फैक्ट्रियों से निकालने वाले केमिकल युक्त पानी को खुले नाले में डाल दिया जाता है। जो आवासीय इलाकों से होता हुआ करहेड़ा से हिंडन में मिलता है। हालत यह है कि इस जहरीले पानी ने करहेड़ा गांव की फसलों तक को बर्बाद कर दिया है।
फाइलों में दर्ज है सभी फैक्ट्रियों में ईटीपी
पिछले साल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जो रिपोर्ट प्रशासन को भेजी है, वह चाैंकाने वाली है। रिपोर्ट में हिंडन को जहरीला बनाने वाली सभी 68 फैक्ट्रियों में ईपीटी लगे दिखाए हैं। चल रहे या बंद हैं इसका रिपोर्ट में जिक्र नहीं हैं।
हालांकि अधिकारियों का दावा है कि प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रिया को नोटिस जारी किया जा चुका है। पिछले चार साल में जल प्रदूषण करने वाली किसी भी फैक्ट्री पर कार्रवाई पीसीबी ने नहीं की है।
डिजाल्व आक्सीजन खत्म, बढ़ी आर्सेनिक की मात्रा
गाजियाबाद की जीवनदायिनी हिंडन नदी ही अब ‘भक्षक ’ बन गई। नदी में बिना ट्रीट हुए मिल रही इंडस्ट्रीज और नालों के पानी से छह जिलों से गुजर रही हिंडन नदी का पानी जहरीला हो गया है।
पानी में आर्सेनिक, फ्लोराइड की मात्रा बढ़ गई है। जबकि डिजाल्व आक्सीजन शून्य है। नतीजा न केवल जीव-जंतु, बल्कि इंसानों के लिए भी पानी घातक बन गया है।
छह जिलों से बह रही नदी के किनारे बसे चार सौ गांवों में नदी का पानी दूषित होने से लोगों को कैंसर, फ्लोरोसिस, चर्मरोग, लीवर संबंधी और गर्भपात जैसी बीमारियां हो रही हैं।
बागपत जिले के गांव ज्यादा हैं दूषित
पीसीबी के आंकड़े बताते हैं कि बागपत से सटे मवीकला, मवीखुर्द और चिरिचिटा गांवों में हालात ज्यादा बदतर है। वजह यहां स्थित चीनी मील हैं। जिनका पानी नदी में बिना ट्रीट हुए मिल रहा है।
अमर उजाला ने उठाया था मुद्दा
वर्ष 2011 में अमर उजाला ने हिंडन प्रदूषण के मुद्दे को जोरशोर से उठाया था। जिसके बाद तत्कालीन डीएम हृदेश कुमार ने हिंडन के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हिंडन महोत्सव की शुरुआत की थी।
इस दौरान गाजियाबाद की विभिन्न संस्थाओं ने इसमें हिस्सा लेकर लोगाें को हिंडन प्रदूषण के प्रति जागरूक किया था। अमर उजाला ने हिंडन महोत्सव में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि इसके बावजूद हिंडन प्रदूषण में किसी प्रकार की कमी नहीं आई है।
नदी किनारे बसे गांव के लोगों का नदी प्रदूषित करने में कोई भूमिका नहीं है। उसके बावजूद उन्हें बीमारियों के रूप में खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। खेती, पशु पालन और खुद की जिंदगी नदी के पानी पर निर्भर है। प्रदूषित नदी के पानी का इस्तेमाल कर लोग बीमार पड़ रहे हैं। -विक्रांत शर्मा, संयोजक, जल बिरादरी
करीब छह माह हुए सर्वे में पानी में आर्सेनिक की मात्रा छह गुना बढ़ी पाई गई है। इसके अलावा लेड, मर्करी और फ्लोराइड भी पानी में बहुतायत मात्रा में पाए गए। इससे बीमारियां तो हो ही रही हैं पानी की कठोरता भी बढ़ी है।- -विजयपाल बघेल, पर्यावरणविद
हिंडन का पानी पीने तो पीने, हाथ धोने लायक भी नहीं हैं। पानी में आर्सेनिक, फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने पर कैंसर, फ्लोरोसिस, चर्मरोग, लीवर संबंधी और गर्भपात जैसी बीमारियां होने का खतरा अधिक है। - डा. अविनाश शर्मा, फिजीशियन