नहीं सुलझ रही इस हाईप्रोफाइल रहस्यमयी मौत की गुत्थी, फोरेंसिक टीम भी फेल
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हिमांशी मौत प्रकरण मिस्ट्री बनता जा रहा है। पहले विसरा रिपोर्ट में कुछ नहीं मिला। इसके बाद आगरा फोरेंसिक से आई रिवॉल्वर की बेलेस्टिक रिपोर्ट से अहम सुबूत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन हिमांशी के हाथ और कश्यप फैमिली के कपड़ों पर बारूद नहीं मिला था।
अब पुलिस की सारी आस घटना का रिक्रिएशन कर गई लखनऊ की फोरेंसिक टीम पर टिकी थी, मगर वह भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। रिपोर्ट आने के बाद अधिकारी भी हैरान हैं। अब यह मामला परिस्थितिजन्य केस की श्रेणी में शामिल होता जा रहा है।
ठीक वैसे ही, जैसे नोएडा के जलवायु विहार में हुआ आरुषि-हेमराज मर्डर केस था। इस केस में सीबीआई के पास कोई पुख्ता सुबूत नहीं था, उसे क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करनी पड़ी थी।
छह जुलाई को 90 दिन हो जाएंगे
इस केस में छह जुलाई को 90 दिन हो जाएंगे, इसके भीतर पुलिस को चार्जशीट दाखिल करनी है। जांच अधिकारी (सीओ द्वितीय) मनीष मिश्र ने बताया कि लखनऊ फोरेंसिक टीम की रिपोर्ट प्राप्त हो गई है। रिपोर्ट से साफ नहीं हो पा रहा है कि हिमांशी को गोली कैसे लगी।
रिपोर्ट में लिखा है कि मे बी सुसाइड और मे बी एक्सीडेंटल। रिपोर्ट के बारे में एक्सपर्ट्स से राय ली जा रही है। इस मामले में जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
बता दें कि छह अप्रैल को संजयनगर में हिमांशी कश्यप का गोली लगा शव बाथरूम में मिला था। हिमांशी बदायूं के बसपा नेता हीरालाला कश्यप की बेटी थीं। उनकी शादी राज्यसभा सांसद नरेंद्र कश्यप के बेटे डॉक्टर सागर कश्यप से दो साल पहले हुई थी।
इस मामले में कविनगर थाने में दहेज मृत्यु की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, जिसमें सांसद सहित उनके परिवार के छह लोग नामजद हैं। नरेंद्र कश्यप, उनकी पत्नी और बेटा डासना जेल में बंद हैं।