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खुली सीमा की चुनौतियां: भारत में घुसपैठ का रास्ता बन रहा हिमालयी कॉरिडोर, नेपाल से सटे इलाकों में बढ़ी निगरानी
Sun, 31 May 2026 06:43 AM IST
दुष्यंत शर्मा
धनंजय मिश्रा, नई दिल्ली
धनंजय मिश्रा, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 31 May 2026 06:43 AM IST
सार
हाल के वर्षों में विभिन्न जांचों और खुफिया सूचनाओं के विश्लेषण से संकेत मिले हैं कि संगठित आपराधिक गिरोह, हवाला नेटवर्क और भारत विरोधी तत्व नेपाल मार्ग का इस्तेमाल अपने संपर्कों और गतिविधियों के विस्तार के लिए करने का प्रयास कर रहे हैं।
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भारत-नेपाल सीमा पर गश्त करते पुलिस व एसएसबी के जवान। file
- फोटो : भारत-नेपाल सीमा पर गश्त करते पुलिस व एसएसबी के जवान।
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विस्तार
भारत-नेपाल की खुली सीमा दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों की आधारशिला रही है, लेकिन बदलते सुरक्षा परिदृश्य में यही सीमा सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौतियां भी खड़ी कर रही है। हाल के वर्षों में विभिन्न जांचों और खुफिया सूचनाओं के विश्लेषण से संकेत मिले हैं कि संगठित आपराधिक गिरोह, हवाला नेटवर्क और भारत विरोधी तत्व नेपाल मार्ग का इस्तेमाल अपने संपर्कों और गतिविधियों के विस्तार के लिए करने का प्रयास कर रहे हैं।
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यही वजह है कि केंद्रीय और राज्य स्तरीय सुरक्षा एजेंसियों ने नेपाल से लगने वाले क्षेत्रों में निगरानी और खुफिया गतिविधियां बढ़ा दी हैं। अधिकारियों के अनुसार, भारत-नेपाल सीमा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी खुली प्रकृति है, जहां दोनों देशों के नागरिकों की आवाजाही आसान है।
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हालांकि यही व्यवस्था आतंकियों और आपराधिक तत्वों के लिए अवसर पैदा करती है। सुरक्षा एजेंसियों की जांच में सामने आया कि सीमा पार सक्रिय नेटवर्क केवल वैचारिक या आतंकी संगठनों के सहारे नहीं चलते, बल्कि इनमें अंतरराष्ट्रीय अपराध जगत से जुड़े लोगों की भी अहम भूमिका होती है।
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हालिया जांच में एक ऐसा ही पैटर्न सामने आया, जिसमें नेपाली नगारिक आंग कामी लामा की भूमिका नेटवर्क के लिए लॉजिस्टिक और समन्वयक के तौर पर बताई जा रही है। जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी की पहचान पाकिस्तान से जुड़े एक अंडरवर्ल्ड ऑपरेटिव मुन्ना झिंगाड़ा से थाईलैंड की जेल में हुई थी।
जेल से रिहाई के बाद दोनों के बीच संपर्क बना रहा और बाद में इस संपर्क का इस्तेमाल भारत में नेटवर्क विस्तार, सुरक्षित ठिकानों की व्यवस्था, आवाजाही और वित्तीय सहायता जैसे कार्यों के लिए किया गया। सूत्रों ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में सामने आए कई मामलों में यह पाया गया कि विदेशी धरती पर सक्रिय अपराधियों और भारत में मौजूद उनके संपर्कों के बीच नेपाल एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट प्वाइंट के रूप में इस्तेमाल किया गया। सूत्रों का कहना है कि वर्तमान दौर में खतरा केवल अवैध घुसपैठ तक सीमित नहीं है।
बड़ी चुनौती उन नेटवर्कों की पहचान करना है जो लंबे समय तक गुप्त रूप से सक्रिय रहकर अपने लिए आधार तैयार करते हैं। यही कारण है कि अब एजेंसियां केवल सीमा क्षेत्रों पर ही नहीं, बल्कि संदिग्ध वित्तीय लेन-देन, डिजिटल संचार, फर्जी दस्तावेजों और अंतरराज्यीय संपर्कों पर भी विशेष नजर रख रही हैं।
दाउद के नेटवर्क के करीब था मुन्ना झिंगाड़ा
खास बात यह है कि मुन्ना झिंगाड़ा लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय अंडरवर्ल्ड गतिविधियों से जुड़ा है। सुरक्षा एजेंसियों के रिकॉर्ड के अनुसार वह कभी दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क का करीबी माना जाता था। वर्ष 2000 में बैंकाक में गैंगस्टर छोटा राजन पर हुए हमले के मामले में भी उसका नाम चर्चा में आया था। थाईलैंड में करीब 17 वर्ष जेल में रहने के बाद वह कराची पहुंचा, जहां से भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नए संपर्क विकसित करने के प्रयासों की बात जांच एजेंसियां कहती रही हैं।