हाईकोर्ट ने RTI पर की टिप्पणी, कहा- जानकारी जुटाने के लिए बाध्य नहीं अधिकारी
सरकारी अधिकारी या विभाग के पास जो जानकारी नहीं है, वह जानकारी जुटाने के लिए उसे विवश नहीं किया जा सकता। सरकारी विभाग के लिए अनिवार्य नहीं है कि वह आरटीआई में देने के लिए सूचना मंगाए।
यह टिप्पणी हाईकोर्ट ने एक निजी स्कूल के पूर्व कर्मचारी की याचिका का निपटारा करते हुए की है। जस्टिस विभू बाखरू ने अपने फैसले में कहा कि आरटीआई कानून के अंतर्गत सरकारी विभाग या अधिकारी केवल वही जानकारी देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है, जो जानकारी उसके पास है।
किसी भी अधिकारी को मांगी गई जानकारी जुटाने के लिए विवश नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह फैसला मुख्य सूचना आयोग (सीआईसी) के फैसले को कायम रखते हुए दिया है।
याचिका में इन चीजों की हुई थी मांग
आयोग ने एक निजी स्कूल के पूर्व कर्मी की याचिका पर दिल्ली सरकार को आगे की जानकारी देने का निर्देश देने से इंकार कर दिया था। पूर्व कर्मी ने निजी स्कूल में कर्मचारियों की सेवा की शर्तों व नियमों की जानकारी मांगी थी।
आयोग ने पूर्व कर्मचारी की याचिका का निबटारा करते हुए दिल्ली सरकार को उपलब्ध जानकारी याची को मुहैया कराने का निर्देश दिया था। यह वह जानकारी थी जो स्कूल ने दिल्ली स्कूल नियम 1973 के तहत सरकार को दे रखी थी।
हाईकोर्ट ने आयोग के 21 सितंबर 2017 के निर्णय को सही ठहराते हुए कहा कि इस फैसले में कोई गलती नहीं है। दिल्ली सरकार तो निजी स्कूलों की पड़ताल कर सकती है, लेकिन आम जनता ऐसा नहीं कर सकती। हालांकि सरकार यह जानकारी मंगा सकती है, लेकिन यह जानकारी जुटाने के लिए वह कानूनी रूप से बाध्य नहीं है।