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पतवाड़ी पर हाईकोर्ट के फैसले से बढ़ी उलझन
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
Updated Fri, 25 Jul 2014 01:21 PM IST
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नोएडा में पतवाड़ी गांव के किसानों को जमीन वापस करने के फैसले ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट (नोएडा एक्सटेंशन) के खरीदारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
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जल्द कब्जा मिलने की बाट जोह रहे खरीदार को अब अपने फ्लैट सपना और दूर होता दिख रहा है। खरीदार इसके लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को दोषी मान रहे हैं।
खरीदारों का कहना है कि प्राधिकरण पतवाड़ी मामले को कोर्ट के समक्ष नहीं रख सका, जिसके चलते कोर्ट ने नाराज होकर यह फैसला सुनाया है।
इस आदेश में हाईकोर्ट ने किसानों को 64 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा व दस फीसदी आवासीय भूखंड देकर समझौता करने का आदेश दिया था, जिसके आधार पर प्राधिकरण ने किसानों को अतिरिक्त मुआवजा दिया। उसके बाद ही ग्रेटर नोएडा वेस्ट के प्रोजेक्टों के निर्माण ने रफ्तार पकड़ी थी।
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अगर प्राधिकरण ने कोर्ट के समक्ष इस मामले को समय से रखा होता तो अवमानना का नोटिस जारी न होता। पतवाड़ी के आसपास बन रहे ज्यादातर प्रोजेक्ट के फ्लैटों का 90 प्रतिशत पैसे का भुगतान हो चुका है। ऐसे में अगर प्राधिकरण को जमीन लौटानी पड़ी तो खरीदार कहीं के नहीं रहेंगे। अब खरीदार नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ऑनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के जरिये इस मामले में मजबूती से पक्ष रखने की सिफारिश करेंगे।
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खरीदार व बिल्डर की प्रतिक्रिया:
आम्रपाली लेजर वैली में खरीदार जय प्रकाश ने कहा कि, 'मेरा फ्लैट आम्रपाली के लेजर वैली में है। कोर्ट के निर्णय के बाद बिल्डर से हमने पता किया था, बिल्डर की तरफ से हमें पूरा आश्वासन मिला है। कोर्ट ने किसी भी बिल्डर को पार्टी नहीं बनाया है, सिर्फ प्राधिकरण को नोटिस जारी किया है और वही कोर्ट में अपना पक्ष रखेगा।'
पटेल नियो टाउन में खरीदार सुखपाल सिंह का कहना है कि, 'मेरा प्रोजेक्ट पटेल नियो टाउन में है। मैंने जब से कोर्ट के आदेश के बारे में सुना है, टेंशन हो गई है। इसमें प्राधिकरण की तरफ से लापरवाही हुई है। कोर्ट ने भी कहा है कि प्राधिकरण अपना पक्ष नहीं रख सका। प्राधिकरण को अपनी बात कोर्ट के समक्ष रखनी चाहिए।'
वहीं पंचशील में खरीदार इंद्रिश गुप्ता ने बताया कि, 'हमें यह समझ में नहीं आ रहा कि जब हाईकोर्ट की तीन जजों की बेंच अपना निर्णय दे चुकी है, तो प्राधिकरण ने इस आदेश को हाईकोर्ट के इस बेंच के सामने क्यों नहीं रखा। इससे तो पता चला है कि प्राधिकरण ही इसमें लापरवाही कर रहा है, बिल्डरों को दोष नहीं दिया जा सकता।'
अरिहंत में खरीदार सुमित सक्सेना ने कहा कि, 'प्राधिकरण ने हाईकोर्ट में समय से अपना पक्ष नहीं रखा, इसलिए हाईकोर्ट नाराज हो गया है। उम्मीद है कि अब प्राधिकरण अपना पक्ष रखेगा। उसके बाद कोर्ट से राहत मिल सकती है।'
नेफोवा के अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने कहा है, 'जब से कोर्ट का निर्णय आया है तब से सैकड़ों खरीदार फोन करके हमसे इस आदेश से जुड़े सवाल पूछ रहे हैं। बिल्डर की तरफ से आश्वासन मिल रहा है, मगर प्राधिकरण की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। नेफोवा खुद से इस मामले को प्राधिकरण के समक्ष रखेगा।'
सीएमडी आम्रपाली ग्रुप व क्रेडाई एनसीआर के अध्यक्ष अनिल शर्मा ने बताया कि, 'इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने ही 21 अक्तूबर 2011 को किसानों को अतिरिक्त मुआवजा देकर समझौता करने का आदेश दिया था। ज्यादातर किसान जमीन का अतिरिक्त मुआवजा ले चुके हैं। कुछ ही किसानों ने मुआवजे नहीं लिए हैं। सिर्फ उन्हीं किसानों को जमीन वापस करने की बात हाईकोर्ट ने कही है। इसलिए बायर्स को परेशान होने की जरूरत नहीं है।'
वहीं सीएमडी, सुपरटेक व उपाध्यक्ष पश्चिमी उत्तर प्रदेश अशोक अरोड़ा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि, 'इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन जजों की पीठ ने 21 अक्तूबर 2011 को फैसला सुनाया था, जिसमें कोर्ट ने अतिरिक्त मुआवजा देने को कहा था। मुआवजा ले लेने वाले किसानों का जमीन पर मालिकाना हक नहीं होगा। इस आदेश के बाद ही हाईकोर्ट ने बाद में दायर हुई कुमारी पुष्पा यादव की याचिका भी खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने प्राधिकरण को सिर्फ नोटिस जारी किया है। इसमें खरीदारों को परेशान नहीं होना चाहिए।'