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Delhi NCR News: सराय काले खां से एम्स-महिपालपुर तक हाई-मोबिलिटी कॉरिडोर का होगा निर्माण
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- एनएचएआई की ओर से तैयार किया जा रहा डीपीआर, योजना पर खर्च होंगे 5000 करोड़ रुपये
- कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ, दिल्ली-देहरादून और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों को सीधे दक्षिण दिल्ली और एयरपोर्ट तक पहुंचने का देगा रास्ता
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में जाम से जूझती सड़कों पर बोझ कम करने के लिए केंद्र सरकार ने एक परियोजना की रूपरेखा तैयार की है। इसके तहत सराय काले खां से एम्स-महिपालपुर तक हाई-मोबिलिटी कॉरिडोर बनाने की योजना पर काम शुरू किया गया है। इस पर लगभग 5000 कराेड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है जिसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से डीपीआर तैयार किया जा रहा है। यह कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ, दिल्ली-देहरादून और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों को बिना रिंग रोड और मध्य दिल्ली से होकर गुजरे, सीधे दक्षिण दिल्ली और आईजीआई एयरपोर्ट तक पहुंचने का सिग्नल फ्री रास्ता देगा।
नाम न बताने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में केंद्रीय परिवहन मंत्री ने चिंता जताई थी। उसमें कहा था कि केवल एम्स से महिपालपुर बाईपास तक बनने वाला 20 किलोमीटर का कॉरिडोर मध्य दिल्ली की भीषण जाम समस्या को पूरी तरह हल नहीं कर पाएगा। मौजूदा समय दिल्ली-मेरठ और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे सराय काले खां पर रिंग रोड से जुड़ते हैं। साथ ही दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का डीडीएनडी-जेवर लिंक भी यहीं से शुरू होगा। ऐसे में आने वाले समय में सराय काले खां पर ट्रैफिक का भारी दबाव होगा। इससे निपटने के लिए सराय काले खां से एम्स-महिपालपुर कॉरिडोर तक 5-6 किलोमीटर लंबी टनल या एलिवेटेड कॉरिडोर की व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके विकल्प के तौर पर तालकटोरा स्टेडियम या 11 मूर्ति क्षेत्र से भी कनेक्टिविटी पर विचार किया जा रहा है।
एनसीआर के वाहन सीधे जा सकेंगे एयरपोर्ट
योजना का उद्देश्य है कि एनएच-48 (दिल्ली-गुरुग्राम हाईवे), एमजी रोड और रिंग रोड पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सके। फिलहाल दिल्ली और गुरुग्राम के बीच यातायात का सबसे बड़ा बोझ दिल्ली-गुरुग्राम हाईवे झेल रहा है। नया कॉरिडोर एम्स और आईएनए होते हुए महिपालपुर तक जुड़ेगा और आगे यह मेहरौली-गुरुग्राम रोड से भी जुड़ेगा। इससे गुरुग्राम से गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा जाने वाले वाहनों को सीधा वैकल्पिक मार्ग मिल सकेगा और उन्हें रिंग रोड या आंतरिक सड़कों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सरकार की इस योजना को राजधानी में यातायात प्रबंधन में एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है। यह परियोजना पूरी होने के बाद सराय काले खां, रिंग रोड, आईएनए और दक्षिणी दिल्ली की प्रमुख सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा।
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अभी कागजों में है योजना
एनएचएआई ने इस परियोजना के लिए डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए मई में परामर्श सेवाओं की निविदा निकाली गई थी, इसमें प्रोजेक्ट का दायरा, एलाइन्मेंट, लागत और निर्माण तकनीक पर काम किया जाएगा। अभी यह परियोजना योजना स्तर पर है, लेकिन इसकी दिशा तय होने के बाद अगले चरण में निर्माण की निविदा जारी की जाएगी। दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार दोनों ही इस परियोजना को लेकर गंभीर हैं।
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- कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ, दिल्ली-देहरादून और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों को सीधे दक्षिण दिल्ली और एयरपोर्ट तक पहुंचने का देगा रास्ता
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में जाम से जूझती सड़कों पर बोझ कम करने के लिए केंद्र सरकार ने एक परियोजना की रूपरेखा तैयार की है। इसके तहत सराय काले खां से एम्स-महिपालपुर तक हाई-मोबिलिटी कॉरिडोर बनाने की योजना पर काम शुरू किया गया है। इस पर लगभग 5000 कराेड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है जिसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से डीपीआर तैयार किया जा रहा है। यह कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ, दिल्ली-देहरादून और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों को बिना रिंग रोड और मध्य दिल्ली से होकर गुजरे, सीधे दक्षिण दिल्ली और आईजीआई एयरपोर्ट तक पहुंचने का सिग्नल फ्री रास्ता देगा।
नाम न बताने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में केंद्रीय परिवहन मंत्री ने चिंता जताई थी। उसमें कहा था कि केवल एम्स से महिपालपुर बाईपास तक बनने वाला 20 किलोमीटर का कॉरिडोर मध्य दिल्ली की भीषण जाम समस्या को पूरी तरह हल नहीं कर पाएगा। मौजूदा समय दिल्ली-मेरठ और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे सराय काले खां पर रिंग रोड से जुड़ते हैं। साथ ही दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का डीडीएनडी-जेवर लिंक भी यहीं से शुरू होगा। ऐसे में आने वाले समय में सराय काले खां पर ट्रैफिक का भारी दबाव होगा। इससे निपटने के लिए सराय काले खां से एम्स-महिपालपुर कॉरिडोर तक 5-6 किलोमीटर लंबी टनल या एलिवेटेड कॉरिडोर की व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके विकल्प के तौर पर तालकटोरा स्टेडियम या 11 मूर्ति क्षेत्र से भी कनेक्टिविटी पर विचार किया जा रहा है।
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एनसीआर के वाहन सीधे जा सकेंगे एयरपोर्ट
योजना का उद्देश्य है कि एनएच-48 (दिल्ली-गुरुग्राम हाईवे), एमजी रोड और रिंग रोड पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सके। फिलहाल दिल्ली और गुरुग्राम के बीच यातायात का सबसे बड़ा बोझ दिल्ली-गुरुग्राम हाईवे झेल रहा है। नया कॉरिडोर एम्स और आईएनए होते हुए महिपालपुर तक जुड़ेगा और आगे यह मेहरौली-गुरुग्राम रोड से भी जुड़ेगा। इससे गुरुग्राम से गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा जाने वाले वाहनों को सीधा वैकल्पिक मार्ग मिल सकेगा और उन्हें रिंग रोड या आंतरिक सड़कों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सरकार की इस योजना को राजधानी में यातायात प्रबंधन में एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है। यह परियोजना पूरी होने के बाद सराय काले खां, रिंग रोड, आईएनए और दक्षिणी दिल्ली की प्रमुख सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा।
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अभी कागजों में है योजना
एनएचएआई ने इस परियोजना के लिए डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए मई में परामर्श सेवाओं की निविदा निकाली गई थी, इसमें प्रोजेक्ट का दायरा, एलाइन्मेंट, लागत और निर्माण तकनीक पर काम किया जाएगा। अभी यह परियोजना योजना स्तर पर है, लेकिन इसकी दिशा तय होने के बाद अगले चरण में निर्माण की निविदा जारी की जाएगी। दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार दोनों ही इस परियोजना को लेकर गंभीर हैं।