हाईलेवल कमेटी की रिपोर्ट, बाहरी लोगों ने लगाए थे जेएनयू में नारे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जेएनयु में 9 फरवरी को अफजल गुरु पर आयोजित कार्यक्रम में देशविरोधी नारे लगाने के मामले में गठित पांच सदस्यीय हाईलेवल कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में विश्वविद्यालय प्रबंधन, जेएनयू सिक्योरिटी, जेएनयू छात्रसंघ की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए हैं।
कमेटी के अध्यक्ष प्रो. राकेश भटनागर की रिपोर्ट में लिखा है कि देशविरोधी नारे लगाने वाले बाहरी समूह थे। हालांकि उस नकाबपोश समूह के बीच एक जेएनयू का छात्र भी शामिल है। लेकिन कमेटी ने उस छात्र के नाम का कहीं भी खुलासा नहीं किया है।
भारत को रगड़ा दो-रगड़ा दो, पाकिस्तान जिंदाबाद जैसे विवादित नारे लगाने वाले बाहरी समूह थे। रिपोर्ट में साफ लिखा है कि भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी, नारा वीडियो में नहीं है। लेकिन मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने इस विवादित नारे को लगाने की पुष्टि की है।
जेएनयू छात्रसंघ के पदाधिकारियों ने जिम्मेदारी नहीं निभाई
रिपोर्ट में कन्हैया के कार्यक्रम में देरी से आने की भी जानकारी दी गई है। पांच सदस्यीय हाईलेवल कमेटी के अध्यक्ष प्रो. राकेश भटनागर ने रिपोर्ट को दो हिस्सों में तैयार किया है।
पहला खोजबीन और दूसरा सिफारिश। रिपोर्ट चार बिंदूओं पर केंद्रित है। इसमें कार्यक्रम, विरोध मार्च, नारेबाजी और प्रशासन के पक्ष में हुई गलती या भूल या प्रशासन की उदासीनता का जिक्र है।
जेएनयू छात्रसंघ के पदाधिकारियों ने जिम्मेदारी नहीं निभाई। छात्रसंघ के सदस्य जिस पद पर हैं, उन्हें बेहद सख्ती, सावधानी और संयम के साथ व्यवहार करना चाहिए था।
ये हैं जेएनयू हाईलेवल कमेटी की रिपोर्ट की मुख्य बातें
- बाहरी लोगों की वजह से जेएनयू कैंपस का माहौल बिगड़ गया। विश्वविद्यालय की साख और गरिमा को ठेस लगी और देश दो हिस्सों में बंट गया।
- डीन ऑफ स्टूडेंट ने सबसे बड़ी गलती की। कार्यक्रम के आयोजन को रद्द करने की जानकारी डीन ऑफ स्टूडेंट ने जेएनयू चीफ सिक्योरिटी को मोबाइल पर मैसेज करके दी। जबकि कायदे में उन्हें लिखित में यह सूचना देनी चाहिए थी।
- वर्ष 2015 में भी ऐसा ही कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रबंधन समेत डीन ऑफिस ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई।
- जेएनयू सिक्योरिटी ने गेट से बाहरी समूह को आने से रोकने पर कोई ध्यान नहीं दिया। सिक्योरिटी के सामने कार्यक्रम में देशविरोधी नारे लगते रहे, लेकिन किसी ने रोकने का प्रयास नहीं किया। नकाबपोश बाहरी समूह देश विरोधी नारे लगा रहा था और विवि प्रबंधन, छात्रसंघ और सिक्योरिटी ने ऐसे बाहरी लोगों को कैंपस से बाहर करने में कोई प्रयास नहीं किया।
- जेएनयू छात्रसंघ के संयुक्त सचिव व एबीवीपी पदाधिकारी सौरभ शर्मा ने इन देशविरोधी नारे लगाने की आपत्ति दर्ज करवाई।
- सिक्योरिटी ने एबीवीपी और अफजल गुरु कार्यक्रम आयोजित करने वालों के बीच विवाद के चलते उन्हें अलग करवाया, जिसके चलते मारपीट की नौबत नहीं आई।
- यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आयोजकों ने बाहरी लोगों के साथ मिलकर इस कार्यक्रम को आयोजित करवाया।
- कार्यक्रम की बुकिंग आठ फरवरी को की गई थी। चार छात्रों का फॉर्म में नाम था। उमर डीन ऑफिस फॉर्म लेकर गया, लेकिन वे नहीं थे। एडिशनल डीन ने साइन किए और रिक्टर की अनुमति के लिए भेजा, लेकिन कमेटी को वह फार्म नहीं मिला।
- सौरभ शर्मा ने 12 बजे कुलपति, रजिस्ट्रार, डीन को घटना की जानकारी दी।
- रजिस्ट्रार को 9457565371 से कॉल आया कि मैं कन्हैया बोल रहा हं, अनुमति क्यों रद्द की। हालांकि कमेटी इस नंबर को ट्रेस करने में नाकाम रही है।
- उमर, अनिर्बन ने कहा कि कार्यक्रम तो होगा, सिक्योरिटी को जो करना है कर लें।
सड़क रोकने के चलते सौरभ को कारण बताओ नोटिस
जेएनयू छात्रसंघ संयुक्त सचिव व एबीवीपी पदाधिकारी सौरभ शर्मा को कारण बताओ नोटिस साबरमती ग्राउंड के पास सड़क पर जाम लगाने के चलते दिया गया है।
साबरमती ग्राउंड में सड़क के एक ओर देशविरोधी नारे लग रहे थे तो दूसरी ओर एबीवीपी के तीस से अधिक छात्र वंदे मातरम्, भारत माता की जय के नारे लगा रहे थे। इसके चलते एबीवीपी के कार्यकर्ता सड़क पर आ गए और सड़क बाधित हुई।
रिपोर्ट में लिखा है कि पाकिस्तान जिंदाबाद, भारत को रगड़ा दो, गो बैक इंडिया आदि नारे बाहरी समूह ने लगाए हैं। इनमें से पाकिस्तान जिंदाबाद व भारत का रगड़ा दो का नारा वीडियो में नहीं है, हालांकि सुरक्षा कर्मी व छात्रों ने गवाही में पुष्टि की है।