नाले की सफाई पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- अधिकाररियों को जेल में डाल दिया जाए, तभी आप खुश होंगे
कुषक नाले की सफाई को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करने के बजाय एजेंसियां मिलकर नाले की सफाई की योजना तैयार करें और मिलकर इसका निरीक्षण करें। साउथ एक्सटेंशन-1 स्थित कुषक नाले को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए लोक निर्माण विभाग, साउथ दिल्ली नगर निगम और दिल्ली जल बोर्ड को आदेश दिए हैं। साथ ही पीठ ने कहा कि क्या कोर्ट की आदेश की अवमानना को आधार मानकर आपको (अधिकारियों) को जेल में डाल दिया जाए, तभी आप खुश होंगे।
आप सभी जनता के सेवक
मुख्य न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वीके राव की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए लोक निर्माण विभाग, साउथ दिल्ली नगर निगम और दिल्ली जल बोर्ड बताएं कि नाले में क्या कार्य करने की जरूरत है, और किसके द्वारा नाले की सफाई होगी और सफाई कब तक पूरी होगी।
इस संबंध में पीठ ने एजेंसियों द्वारा स्थिति रिपोर्ट दायर करने के लिए निर्देश हैं। पीठ ने कहा कि आप सभी जनता के सेवक हैं और इस मुद्दे को लेकर सभी एजेंसियों को साथ में बैठकर परेशानी का समाधान निकालना चाहिए न कि एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने चाहिए। यही वजह है कि सभी एजेंसियां आज कोर्ट में खड़ी हैं।
नाले की सफाई न करना आदेश की अवमानना
पीठ के समक्ष सुनवाई के बीच साउथ दिल्ली नगर निगम ने दलील दी थी कि कुषक नाला बारापुल्ला फ्लाईओवर के नीचे से निकलता है, इसलिए लोक निर्माण विभाग को इसकी सफाई करनी चाहिए। इस दलील के बाद पीठ ने सभी एजेंसियों के प्रति सख्ती बरती। इसके साथ ही पीठ ने कहा कि मामले में लगातार सुनवाइयों के बावजूद नाले की सफाई न करना कोर्ट के आदेश की अवमानना है।
पीठ ने एजेंसियों से पूछा कि अगर कोर्ट की अवमानना को ध्यान में रखते हुए आरोपियों को जेल भेज दिया जाए तो क्या आप खुश होंगे। इस मामले में पीठ ने पहला आदेश 25 मई 2016, दूसरा आदेश 27 अक्तूबर 2017 और तीसरा आदेश 22 नवंबर 2018 को दिया गया। बरसात के मौसम में जलभराव को लेकर दायर इस जनहित याचिका पर अगस्त 2012 से सुनवाई चल रही है।