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हाईकोर्ट ने डीयू के नए दाखिला नियमों को रद कर पुराने नियमों पर दिया आदेश, अब अंतिम तिथि 22 जून

Fri, 14 Jun 2019 09:49 PM IST
राजेश सैनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राजेश सैनी Updated Fri, 14 Jun 2019 09:49 PM IST
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High Court quits new admission rules of DU now Last date for admission till 22nd June
दिल्ली हाईकोर्ट (फाइल फोटो)

हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) द्वारा स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला संबंधी तय नए नियमों को शुक्रवार को रद कर पिछले साल के नियमों पर ही दाखिला करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने छात्रों को राहत देते हुए दाखिले की अंतिम तिथि भी 22 जून तक बढ़ा दी है। इस फैसले से डीयू में दाखिले के लिए आवेदन करने वाले हजारों छात्रों को फायदा मिलने की उम्मीद है। मामला बी. कॉम ऑनर्स व बीए ऑनर्स अर्थशास्त्र में दाखिले के लिए गणित विषय को अनिवार्य कर दिया गया था। इस बदलाव को तीन याचिकाएं दायर कर चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने इन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद शुक्रवार दोपहर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। 

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न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा व न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की खंडपीठ ने कहा कि इस बात में कोई संदेह नहीं कि समय के साथ तालमेल बैठाना जरूरी है। कोई आपको शिक्षा के स्तर में सुधार करने से नहीं रोक रहा। कोई आपके निर्णय पर सवाल नहीं उठा रहा है लेकिन आप की टाइमिंग सही नहीं है। स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला संबंधी नियमों में बदलाव की घोषणा दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) काफी पहले कर सकता था जबकि इनकी घोषणा दाखिला प्रक्रिया शुरु होने से महज एक दिन पहले की गई। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी उन दो जनहित याचिकाओं व एक याचिका पर सुनवाई करते हुए की है। 
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इससे पूर्व कोर्ट ने एक घंटा से ज्यादा चली सुनवाई के दौरान कहा कि नए दाखिला नियम उन छात्रों के लिए हैं जिन्होंने इस साल 12 वीं की परीक्षा पास की है लेकिन संशोधित नियमों को दाखिले के लिए आवेदन शुरु होने से केवल एक दिन पहले घोषित किया गया। कोर्ट ने सवाल किया कि क्या यह नियम एक दिन पहले बदले जा सकते हैं। आप छात्रों को तीन माह पहले इसकी सूचना दे सकते थे।

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डीयू ने अपने निर्णय को सही ठहराते हुए तर्क दिया कि वह हर साल दाखिला के लिए मानकों में बदलाव करता है और इसकी जानकारी सूचना बुलेटिन में हर साल दी जाती है। यह हमेशा के लिए नहीं होता। इसलिए छात्रों को इसकी पूर्व सूचना देना जरूरी नहीं था। विश्वविद्यालय की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि नए माकनों से कोई छात्र दाखिले से वंचित नहीं होगा और अगर ऐसा होता है तो प्रभावित छात्र शिकायत समिति या कोर्ट आ सकता है। इसलिए इस समय कोर्ट दाखिला प्रक्रिया में हस्तक्षेप न करे क्योंकि इससे पूरी दाखिला प्रक्रिया प्रभावित होगी। 

याची खुशी श्रीवास्तव की ओर से उनके पिता अधिवक्ता अनुपम श्रीवास्तव ने कहा कि अगर उसके बेस्ट ऑफ फोर विषयों में गणित को शामिल किया जाता है तो उसके कुल अंकों में एक फीसदी से ज्यादा की गिरावट आएगी। डीयू के अच्छे कॉलेज में एक फीसदी से भी कम अंकों पर दाखिला प्रभावित हो जाता है।याचिकाकर्ताओं का दावा है कि बी.कॉम आनर्स व बीए ऑनर्स अर्थशास्त्र में दाखिले के लिए किए गए मानकों में बदलाव संविधान में दिए गए समानता के अधिकार का उल्लंघन है क्योंकि यह बिना सोचे समझे मनमाने तरीके से किया गया है। इसलिए इसे रद किया जाना चाहिए। नए निमयों के मुताबिक इन दोनों पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए गणित को बेस्ट ऑफ फोर विषयों में अनिवार्य कर दिया गया है। यह जानकारी 29 मई को जारी बुलेटिन में दी गई थी और 30 मई से दाखिला प्रक्रिया शुरु होनी थी।

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