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Delhi NCR News: हाईकोर्ट ने गौतम गंभीर के व्यक्तित्व अधिकार की रक्षा की
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- कोर्ट ने सोशल मीडिया यूजर्स और प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया कि वे गंभीर के नाम, तस्वीर, आवाज या उनसे जुड़ी किसी भी पहचान का बिना अनुमति इस्तेमाल न करें
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर के पर्सनेलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकार) की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कई सोशल मीडिया यूजर्स और प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया कि वे गंभीर के नाम, तस्वीर, आवाज या उनसे जुड़ी किसी भी पहचान का बिना अनुमति इस्तेमाल न करें। न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि गंभीर सम्मानित क्रिकेटरों में से एक हैं और उन्हें अपने नाम व छवि पर पूरा अधिकार है। किसी भी व्यक्ति या संस्था को उनकी अनुमति के बिना इनका उपयोग करने का अधिकार नहीं है। गंभीर ने कोर्ट में शिकायत की थी कि कुछ लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डीपफेक, फेस-स्वैपिंग और वॉइस क्लोनिंग तकनीक का इस्तेमाल कर उनके नकली वीडियो और कंटेंट बना रहे हैं। इन वीडियो में उन्हें गलत तरीके से दिखाया गया, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा।
याचिका में यह भी कहा गया कि उनकी तस्वीर का इस्तेमाल कर ऑनलाइन सामान भी बेचा जा रहा है। इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी संबंधित लोगों को ऐसे किसी भी कंटेंट को बनाने, शेयर करने या प्रचारित करने से रोक दिया। कोर्ट ने अमेजन, फ्लिपकार्ट, गूगल और मेटा जैसे प्लेटफॉर्म्स को भी निर्देश दिया कि वे 36 घंटे के भीतर आपत्तिजनक सामग्री हटा दें।
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर के पर्सनेलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकार) की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कई सोशल मीडिया यूजर्स और प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया कि वे गंभीर के नाम, तस्वीर, आवाज या उनसे जुड़ी किसी भी पहचान का बिना अनुमति इस्तेमाल न करें। न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि गंभीर सम्मानित क्रिकेटरों में से एक हैं और उन्हें अपने नाम व छवि पर पूरा अधिकार है। किसी भी व्यक्ति या संस्था को उनकी अनुमति के बिना इनका उपयोग करने का अधिकार नहीं है। गंभीर ने कोर्ट में शिकायत की थी कि कुछ लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डीपफेक, फेस-स्वैपिंग और वॉइस क्लोनिंग तकनीक का इस्तेमाल कर उनके नकली वीडियो और कंटेंट बना रहे हैं। इन वीडियो में उन्हें गलत तरीके से दिखाया गया, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा।
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याचिका में यह भी कहा गया कि उनकी तस्वीर का इस्तेमाल कर ऑनलाइन सामान भी बेचा जा रहा है। इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी संबंधित लोगों को ऐसे किसी भी कंटेंट को बनाने, शेयर करने या प्रचारित करने से रोक दिया। कोर्ट ने अमेजन, फ्लिपकार्ट, गूगल और मेटा जैसे प्लेटफॉर्म्स को भी निर्देश दिया कि वे 36 घंटे के भीतर आपत्तिजनक सामग्री हटा दें।
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