Delhi High Court: नजफगढ़ मंडी एसोसिएशन को दिल्ली जल बोर्ड की जमीन खाली करने का आदेश, 15 लाख निवासियों को मिलेगा लाभ
हाईकोर्ट ने नजफगढ़ मंडी एसोसिएशन को जल उपचार संयंत्र के निर्माण के लिए दिल्ली जल बोर्ड की जमीन खाली करने का आदेश दिया है। एसोसिएशन को उनके कब्जे वाली भूमि को खाली करने के लिए छह सप्ताह का समय देते हुए कहा कि समयावधि किसी भी हालत में नहीं बढ़ेगी।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की खंडपीठ ने अपने 2 जून के फैसले में कहा कि उक्त जल उपचार संयंत्र शहर के एक बहुत बड़े हिस्से की सेवा के लिए आवश्यक है और इससे लगभग 15 लाख निवासियों को लाभ होगा। अदालत ने कहा स्पष्ट रूप से बड़े पैमाने पर जनहित को नुकसान होगा यदि प्रस्तावित जल उपचार संयंत्र के निर्माण में किसी भी तरह से बाधा उत्पन्न होती है।
पीठ ने कहा बेशक जिस भूमि पर अपीलकर्ता वर्तमान में स्थित हैं और जहां उन्हें कोविड स्थिति के कारण डीडीएमए के आदेशों के तहत स्थानांतरित किया गया था, वह दिल्ली जल बोर्ड की है और दिल्ली जल बोर्ड को 50 एमजीडी क्षमता वाला जल शोधन संयंत्र की स्थापना के लिए उक्त भूमि की आवश्यकता है।
पीठ ने पिछले साल पारित एक अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया जिसके तहत एसोसिएशन के सदस्य जो फलों और सब्जियों में थोक व्यापार करने के लिए भूमि पर बसाए विक्रेताओं को अगले आदेश तक उसी पर कब्जा बनाए रखने को कहा था। दिल्ली जल बोर्ड ने इस आधार पर अंतरिम आदेश को रद्द करने की मांग की थी कि जल उपचार संयंत्र के निर्माण के लिए भूमि की आवश्यकता है, जिसे निवासियों द्वारा हो रही जल आपूर्ति के निवारण के लिए बहुत आवश्यक बताया गया है।
अंतरिम आदेश को रद्द करते हुए पीठ ने एसोसिएशन और उसके सदस्यों को वर्तमान में उनके कब्जे वाली भूमि को खाली करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। पीठ ने कहा हम यह स्पष्ट करते हैं कि और समय नहीं बढ़ाया जाएगा। यदि अपीलकर्ता एसोसिएशन के सदस्य स्वेच्छा से क्षेत्र खाली नहीं करते हैं तो जलबोर्ड को उन्हें हटाने के लिए जबरन कदम उठाने के लिए रास्ता खुला होगा।
दिल्ली जल बोर्ड की ओर से यह तर्क दिया गया कि भूमि उसकी है, इसलिए एसोसिएशन को उक्त भूमि पर अपना थोक व्यापार करने के लिए कब्जा जारी रखने का कोई निहित अधिकार नहीं है। बोर्ड ने कहा जल शोधन संयंत्र से लगभग 14-15 लाख की आबादी की सेवा करने का अनुमान लगाया गया है। दूसरी ओर एसोसिएशन ने तर्क रखा कि बहादुरगढ़ झरोदा रोड पर विक्रेताओं के बैठने से न केवल उनके लिए बल्कि बड़े पैमाने पर जनता के लिए भी गंभीर मुश्किलें पैदा होंगी क्योंकि इससे सड़क पर गंभीर भीड़ हो जाएगी, जिसमें बीच में एक डिवाइडर भी है। जहां करीब तीन हजार टन फल व सब्जियां प्रतिदिन आती है।
एसोसिएशन के सदस्यों से मुख्य सचिव बैठक कर निकाले समाधान
अदालत ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को उक्त एसोसिएशन के प्रतिनिधियों और अन्य सभी संबंधित अधिकारियों के साथ एक बैठक तय करने का निर्देश दिया ताकि उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों को हल करने का प्रयास किया जा सके। पीठ ने कहा बैठक अगले दस दिनों में आयोजित की जाएगी जिसके लिए अपीलकर्ता एसोसिएशन को उनके वकील के माध्यम से नोटिस जारी किया जाएगा। साथ ही पीठ ने यह स्पष्ट किया कि भूमि खाली करने के लिए अपीलकर्ता को दी गई समय सीमा अंतिम है। यह बैठक के परिणाम के अधीन नहीं है। और अपीलकर्ता बैठक के परिणाम से संतुष्ट हैं या नहीं, वे किसी भी स्थिति में वर्तमान में अपने कब्जे वाले क्षेत्र को खाली करेंगे। पीठ ने दिल्ली सरकार को एसोसिएशन के सदस्यों को बहादुरगढ़ झरोदा रोड पर स्थानांतरित करने के आदेश में जारी निर्देशों को लागू करने का भी निर्देश दिया।