दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश, हिंसा प्रभावित लोगों को कोरोना से बचाने की व्यवस्था करे सरकार
हाईकोर्ट ने उत्तर-पूर्वी जिले में हुई हिंसा में बेघर हुए लोगों के लिए पुराने मुस्तफबाद इलाके में बनाए गए ईदगाह राहत शिविर में कोरोना संक्रमण से बचाव की पर्याप्त सुविधाओं देने के का आदेश दिल्ली सरकार को दिया है।
न्यायमूर्ति हीमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद की खंडपीठ ने आदेश दिया कि शिविर में रह रहे लोगों को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए डॉक्टर, पर्याप्त दवाईयों के साथ जन स्वास्थ्य अधिकारी और उपकरणों समेत अन्य चीजों की व्यवस्था दो दिनों में की जाए।
पुराने मुस्तफाबाद ईदगाह शिविर में रह रहे लोगों में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए मोहम्मद अख्तर ने याचिका दायर कर सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिल्ली सरकार को देने का आग्रह किया था।
याचिका में बताया गया था कि 23 और 24 फरवरी को उत्तर-पूर्वी जिले में हुई हिंसा में कई लोग बेघर हो गए। इसके बाद लोगों के लिए ईदगाह में बनाए राहत शिविर में करीब 600 लोग रह रहे हैं।
ई-रिक्शा पर कंपनी नहीं करेगी बीएमडब्ल्यू ट्रेड मार्क का प्रयोग: हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक भारतीय ई-रिक्शा निर्माता कंपनी द्वारा जर्मनी की प्रसिद्ध वाहन कंपनी बीएमडब्लू से मिलता जुलता ट्रेड मार्क इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि भारतीय ई-रिक्शा निर्माता ‘डीएमडब्ल्यू’ या ऐसा कोई अन्य ट्रेड मार्क का इस्तेमाल नहीं करेगा, जो बीएमडब्ल्यू से मिलता-जुलता हो।
न्यायमूर्ति जयंत नाथ की एकल पीठ ने अपने अंतरिम आदेश में कहा पहली नजर में याची कंपनी बीएमडब्ल्यू यह साबित करने में सफल रही कि भारतीय कंपनी ‘छल करने की मंशा’ से उसके ट्रेड मार्क से मिलता जुलता नाम लेकर जर्मन कंपनी की प्रतिष्ठा का अनुचित तरीके से लाभ लेने की कोशिश कर रही है।
हाईकोर्ट ने भारतीय कंपनी ओम बालाजी आटोमोबाइल (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड की इस दलील को अस्वीकार कर दिया कि वह 2013 से ‘डीएमडब्लू’ ट्रेड मार्क से ई-रिक्शा का निर्माण कर रही है और बीएमडब्ल्यू ने चार साल बाद 2017 में यह वाद दायर किया। पीठ ने कहा कि मौजूदा वाद दायर करने में बीएमडब्लू का विलंब भी प्रतिवादी के पक्ष में आदेश देने के लिये पर्याप्त नहीं होगा।
पीठ ने कहा कि जर्मन कंपनी बीएमडब्ल्यू 1923 से इस ट्रेड मार्क से मोटर साइकिलों का निर्माण कर रही है और 1928 से वह इसी नाम से कारों का निर्माण कर रही है। अदालत ने कहा कि भारतीय कंपनी का ट्रेड मार्क साधारण व्यक्ति के मन में भ्रम पैदा करने की क्षमता रखता है क्योंकि यह बीएमडब्ल्यू से काफी मिलता-जुलता है।