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हाईकोर्ट ने नाबालिग के अपहरण और रेप के दोषी की सजा तीन से बढ़ाकर की सात साल

Mon, 25 Apr 2016 02:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 25 Apr 2016 02:43 AM IST
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high court increased the imprisonment of minor rape and kidnap accused

हाईकोर्ट ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ यौन अपराध बढ़ रहे हैं। ऐसे मामलों में लिप्त अपराधियों के साथ कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। अदालत ने नाबालिग के अपहरण व रेप के मामले में दोषी ठहराए गए तंजीर आलम को मिली तीन वर्ष कैद की सजा को बढ़ाकर सात वर्ष करते हुए यह टिप्पणी की।

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न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी और न्यायमूर्ति संगीता धींगरा सहगल की खंडपीठ ने कहा कि अगर ऐसे अपराध होते हैं तो इनसे कड़ाई से निपटा जाना जरूरी है। अदालत ने कहा कि दोषी को भारतीय दंड संहिता के तहत दी जाने वाली सजा उसके अपराध की गंभीरता के अनुसार होनी चाहिए और समाज पर इसका असर होना चाहिए।
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खंडपीठ ने कहा कि वर्तमान मामले में अपराध के समय पीड़ित की उम्र 16 साल से भी कम थी और कानून में ऐसे अपराध के लिए सजा न्यूनतम सात साल के सश्रम कारावास की है, जिसे तब ही कम किया जा सकता है जब इसके लिए कोई विशेष और पर्याप्त कारण हों।

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आलम को 15 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म का दोषी है

high court increased the imprisonment of minor rape and kidnap accused

अदालत ने कहा कि यह उचित नहीं है कि अपराध के समय पीड़ित की उम्र को देखते हुए दोषी को न्यूनतम सजा से कम दंड दिया जाए। आलम को 15 वर्षीय एक किशोरी से दुष्कर्म करने का दोषी ठहराया गया है।

यह घटना मई 2011 में हुई थी। नवंबर, 2015 में निचली अदालत ने आलम को पीड़िता का अपहरण करने और दुष्कर्म करने का दोषी ठहराया था। आलम ने पीड़िता का उस समय अपहरण किया, जब वह उत्तर पूर्वी दिल्ली में सीलमपुर पुलिस थाने के पास अपने पिता से मिलने जा रही थी।

दोषी ने इस आरोप को गलत बताते हुए दावा किया कि लड़की अपनी मर्जी से उसके साथ गई थी क्योंकि वह उससे प्यार करती थी और विवाह करना चाहती थी। दोषी ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

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