बच्चों की गवाही पर पिता की उम्रकैद बरकरार, 2012 में की थी पत्नी की हत्या
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जस्टिस एस. मुरलीधर व जस्टिस विनोद गोयल की खंडपीठ ने कहा मृतका के बच्चों की गवाही उनके पिता को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त है और निचली अदालत के फैसले में दखल देने की जरूरत नहीं है।
खंडपीठ ने फैसले में कहा बच्चों ने अपनी गवाही में पूरा वाकिया बताया है और उन्होंने याची की भूमिका का भी हवाला दिया है तथा उनकी गवाही में कोई विरोधाभास नहीं है। उनकी गवाही पिता को दोषी ठहराने के लिए काफी है।
हाईकोर्ट ने फैसले में इस बात पर भी गौर किया कि निचली अदालत ने दोषी पर 25 हजार का जुर्माना लगाया है, लेकिन बच्चों के लिए मुआवजे का निर्देश नहीं दिया।
इसलिए दिल्ली विविध सेवा प्राधिकरण अनाथ हुए बच्चों को कानून के मुताबिक मुआवजा सरकार से दिलवाए। पुलिस के मुताबिक, नयी बस्ती किशन गंज निवासी याची ने 17 अप्रैल 2012 को पत्नी पर मिट्टी का तेल डालकर जला दिया था।
वारदात के समय उसके बच्चे भी वहां मौजूद थे। बच्चों ने गवाही में कहा कि उनका पिता शराबी है। उस दिन भी शराब खरीदने के लिए पत्नी से पैसे मांग रहा था। इस बात पर दोनों के बीच झगड़ा हुआ था।