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महिला सुरक्षा पर फिर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र को जमकर लताड़ा

Thu, 28 Jan 2016 08:24 PM IST
Updated Thu, 28 Jan 2016 08:24 PM IST
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High court harsh on women's safety,  fiercely criticized central government

हाईकोर्ट ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की भर्ती नहीं करने पर एक बार फिर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने पूछा कि पर्याप्त सुरक्षा बल के अभाव में आप कैसे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।

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अदालत ने कहा यह गंभीर मुद्दा है कि दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के अधीन है। केंद्र का एक मंत्रालय पुलिसकर्मियों की भर्ती को मंजूरी देता है, तो दूसरा फंड जारी करने से इनकार कर रहा है।
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वहीं, दूसरी तरफ सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने अप्रत्यक्ष रूप से दिल्ली पुलिस को अपने अधीन करने का तर्क भी रखा। सरकार ने कहा कि केंद्र कानून व्यवस्था अपने पास रखे और आपराधिक जांच हमारे हवाले कर दे। ऐसा होने पर हम पुलिस को फंड भी देने के लिए तैयार हैं।

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बताएं कितने पुलिसकर्मियों के पास बुलेट प्रूफ जैकेट है

High court harsh on women's safety,  fiercely criticized central government

न्यायमूर्ति बीडी अहमद और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की खंडपीठ ने कहा कि यह हंसी की बात है कि सरकार मानव शक्ति बढ़ाने को तरजीह देने के बजाय प्रौद्योगिकी की बात कर रही है।


अदालत ने कहा कि आप प्रौद्योगिकी की बात करते हैं, कितने पुलिसकर्मियों के पास बुलेट प्रूफ जैकेट है। खंडपीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक अतिरिक्त फोर्स भर्ती मुद्दे पर केंद्र का रवैया स्पष्ट करें। मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी।

खंडपीठ ने अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की भर्ती के लिए गृह मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बावजूद वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा फंड जारी नहीं करने पर सवाल उठाते हुए कहा कि दो मंत्रालय इस मुद्दे पर आपस में लड़ रहे हैं। एक कहता है कि अतिरिक्त फोर्स जरूरी है, तो दूसरा उसे मंजूरी नहीं दे रहा।

यह है पूरा मामला जिस पर केंद्र को लगी फटकार

High court harsh on women's safety,  fiercely criticized central government

सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता चेतन शर्मा ने कहा कि उनके पास पर्याप्त सुरक्षा बल है। वर्तमान में दिल्ली पुलिस की कुल संख्या 84,500 है।


अदालत ने जुलाई 2013 के आदेश में दिल्ली पुलिस में अतिरिक्त 14,869 कर्मियों की भर्ती के लिए केंद्र सरकार को कहा था। इस पर करीब 450 करोड़ रुपये का खर्च आना है। दिसंबर 2015 में केंद्र ने अदालत को बताया था कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस में अलग से 4227 पद स्वीकृत किए गए हैं।

वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने 4227 पदों को दो चरणों 2016-17 और 2017-18 में भरने का तर्क दिया था। अधिवक्ता जैन ने बताया कि 11000 अतिरिक्त पद भरने के लिए उच्चाधिकार कमेटी के पास मामला भेजा गया है।

अदालत की न्यायमित्र मीरा भाटिया ने कहा कि पुलिस ने 44 संवेदनशील स्थानों का चयन कर सीसीटीवी कैमरे लगाने का तर्क रखा, लेकिन अभी तक उस पर काम शुरू नहीं हुआ। अदालत राष्ट्रीय राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा मुद्दे पर सुनवाई कर रही है।

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